Kohramlive : रविवार की सुबह हैदराबाद की ऐतिहासिक गलियों में उदासी की चादर तनी थी। चारमीनार के साये तले गुलजार हाउस की एक बहुमंज़िला इमारत से धुआं उठ रहा था। एक ऐसी चीख़ जो आग की लपटों में भी सुनाई दे रही थी। सुबह करीब 6 बजे, जब शहर नींद की आगोश में था, तब एक शॉर्ट सर्किट ने पूरी इमारत को चपेट में ले लिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक ज़िंदगी के कई चराग बुझ चुके थे। 17 लोग, जिनमें आठ मासूम बच्चे भी थे हमेशा के लिए खामोश हो गये।
17 लोग उस इमारत में फंसे थे, जिनमें से कई की सांसें वहीं थम गईं। अग्निशमन दल समय पर पहुंचा, मगर अफ़सोस… शायद तक़दीर उनसे तेज़ थी। कई लोगों को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गहरा शोक जताया और राहत कार्यों पर खुद नज़र बनाये रखी। PM नरेंद्र मोदी ने भी दुख प्रकट करते हुये मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हज़ार रुपये की सहायता देने का ऐलानकिया। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और कांग्रेस सांसद अनिल कुमार यादव मौके पर पहुंचे और हालात का जायज़ा लिया। चारमीनार आज खामोश है, और उसके पास की गलियों में मातम पसरा है। गुलजार हाउस अब गुलज़ार नहीं रहा। वहां सिर्फ़ राख है, और उन आवाज़ों की गूंज जो अब कभी नहीं लौटेंगी…








