Ranchi : रांची की जमीन, वो जमीन जिस पर वर्षों से उम्मीदें बोई जाती रही हैं, मंगलवार को उसी उम्मीद के साथ, एक बुज़ुर्ग किसान अपनी लाठी टेकते हुये अंचल कार्यालय पहुंचा। चेहरा झुर्रियों से भरा था, पर आंखों में अपने बंटवारे के कागज का इंतजार था। वहीं एक विधवा मां अपनी बिटिया की पेंशन की आस लिये कतार में खड़ी थी और एक अधेड़ व्यक्ति, जो सालों से भूमि निबंधन के पन्नों में उलझा था, अंचल कार्यालय की सीढ़ियां चढ़ रहा था। पर आज कुछ अलग था, क्योंकि आज का दिन किसी आम दिन जैसा नहीं था, आज का दिन “जनता के नाम” था। रांची के DC मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर जिले के हर अंचल कार्यालय में अधिकारी जनता की बात सुनने को तत्पर थे। कुर्सियां नहीं, आज फर्श पर जनता के दुखों का हिसाब बिछा था।
अधिकारियों की कलमें सिर्फ फाइलों में नहीं, लोगों की जिंदगियों में राहत लिख रही थीं। कहीं दाखिल-खारिज की फाइल को तुरंत मंज़ूरी मिली तो कहीं पेंशन की एक गुहार पर महिला की आंखों में राहत के आंसू छलक आये। ऑन-द-स्पॉट समाधान, ये सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि उस दिन का सबसे मधुर गीत थे। DC की एक आवाज पूरे जिले में गूंज रही थी,
“सरकार की योजनाएं सिर्फ घोषणाएं नहीं, ये संकल्प हैं, अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारा धर्म है।” और जब दोपहर ढली, तो सूरज के साथ-साथ लोगों की मुस्कुराहटें भी घर लौटीं, क्योंकि उन्हें यकीन हो गया था कि अब प्रशासन दरवाजे बंद नहीं करता, बल्कि दिल खोलकर सुनता है।











