UP : मुगलकाल में गोमती नदी की तलहटी में बसे गांव हाजीपुर के नाम अब सरकारी फाइलों में इतिहास बन गया। वर्षों की कोशिश, लगातार पैरवी और मजबूत इच्छाशक्ति के बाद शनिवार को गांव का नाम बदल कर सियारामपुर कर दिया गया। जैसे ही नाम बदलने की आधिकारिक पुष्टि हुई, पूरा गांव जश्न में डूब गया। गली-गली में मिठाइयों की खुशबू और चेहरों पर मुस्कान साफ नजर आई।
2022 से शुरू हुआ था नाम परिवर्तन का सफर
भाजपा किसान मोर्चा के निवर्तमान जिला मंत्री सुनील तिवारी और ग्राम प्रधान गुज्जो देवी उर्फ आशा ने वर्ष 2022 में एमएलसी अशोक अग्रवाल को पत्र सौंपकर गांव का नाम बदलने की मांग रखी थी। तर्क साफ था, गांव में मुस्लिम आबादी नहीं, फिर भी नाम हाजीपुर। एमएलसी अशोक अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुये तत्कालीन जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह को प्रस्ताव भेजा। डीएम के निर्देश पर कराई गई जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि गांव के 209 परिवारों और 1118 की आबादी में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है। इसके बाद जिला पंचायत की बैठक में गांव का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। प्रस्ताव ने आगे बढ़ते हुये मंडलायुक्त, राजस्व परिषद, विशेष सचिव मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव राजस्व की मंजूरी हासिल की। अंततः 30 दिसंबर 2025 को गृह मंत्रालय, नई दिल्ली से नाम परिवर्तन की अंतिम स्वीकृति मिल गई। इस बीच शनिवार को जब यूपी के CM ने अपने एक्स (X) अकाउंट पर भरावन के हाजीपुर को सियारामपुर किये जाने की पुष्टि की तो गांव में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं, ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया।














