New Delhi : दिल्ली की उस सर्द शाम में जब पूरा देश युद्ध की आशंकाओं से थर्राया हुआ था, प्रधानमंत्री निवास के द्वार एक बार फिर राष्ट्र के रखवालों के लिये खुले। लाल फर्श पर सजे कदमों की आहट और अंदर गोल मेज के चारों ओर बैठे थे वे योद्धा, जिन्होंने न सिर्फ युद्ध लड़ा, बल्कि भारत की शान को अपनी सांसों से सींचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंखों में चिंता नहीं, संकल्प था। उन्होंने पूर्व वायुसेना प्रमुख, सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख और ऑपरेशन ब्लू स्टार, कारगिल व सर्जिकल स्ट्राइक के नायक अफसरों की आंखों में झांका और कहा,”देश फिर एक बार मोड़ पर है, पर इस बार हम सिर्फ जवाब नहीं देंगे, इतिहास लिखेंगे।” बैठक में मौन कम और संकल्प अधिक था।
विंग कमांडर व्योमिका सिंह, जो आज भी फाइटर जेट की गरजती गूंज से रोमांचित हो जाती हैं, उन्होंने पाक के ड्रोन हमलों और जवाबी हमले की रणनीति पर खुलकर बात की। “हमने चार पाकिस्तानी एयर डिफेंस बेस पर धावा बोला। उनके रडार हमारी नज़र से नहीं बच सके। औरतें अब सिर्फ घर की नहीं, सरहद की भी रखवाली कर रही हैं।” कर्नल सोफिया कुरैशी, जिनकी आंखों में LOC की माटी आज भी धूल की तरह बसी है। बोलीं, “पाकिस्तान ने 400 से ज्यादा तुर्की ड्रोन उड़ाये, पर S-400 ने उन्हें हवा में जला दिया। बठिंडा, जम्मू, श्रीनगर, सब बचा लिया। पर चोट खाई है हमने भी और अब जवाब में सिर्फ कार्रवाई नहीं, चेतावनी होगी।” प्रधानमंत्री मोदी ने सबकी बात सुनी, सिर झुकाया उन जवानों की शहादत को याद कर फिर बोले, “ये सिर्फ युद्ध नहीं ये न्याय का यज्ञ है। और इस यज्ञ में यदि मैं भी आहुति दूं, तो पीछे नहीं हटूंगा।” कमरा सन्नाटे में डूबा, फिर तालियों से गूंज उठा।






