Kohramlive : नई दिल्ली से एक खबर आई है, जो बेहद चौंकाने वाली है। कभी जो सूरज हमारे खेतों को जगाता था, छतों पर सुनहरी धूप बिखेरता था, अब वही सूरज जैसे थक गया है। तीन दशकों में भारत में सूरज की रोशनी 13 घंटे घट गई है। यह खुलासा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और देशभर के मौसम वैज्ञानिकों के अध्ययन में हुआ है। 1988 से 2018 तक चले इस शोध ने दिखाया कि मैदानी इलाकों में हर साल औसतन 13 घंटे धूप कम हुई, वहीं, हिमालय पर 9 घंटे का अंधेरा और बढ़ गया। और इसकी वजह? वही इंसान, जिसने अपने आसमान पर धुआं, धूल और प्रदूषण की परतें चढ़ा दीं। वही जो शहर बनाते-बनाते सूरज का रास्ता ही रोक बैठा।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘Scientific Reports’ में प्रकाशित हुआ है, जिसमें कहा गया है कि उत्तर भारत में धूप की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर भारत अब भी कुछ राहत में है। BHU के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव मीडिया से कहते हैं कि “सबसे ज्यादा धूप की कमी मानसून और उसके बाद के महीनों में देखने को मिल रही है। अगर यही हाल रहा, तो भारत की सौर ऊर्जा नीति और जलवायु संतुलन दोनों पर संकट गहरायेगा। बनारस इसका जीवंत उदाहरण बन चुका है, जहां तापमान में 10 डिग्री का अंतर और 771% अधिक वर्षा दर्ज की गई है। यह सिर्फ मौसम नहीं, चेतावनी है, एक बदलते युग की।
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