KohramLive : आम खाने के शौकीन करोड़ों जनों के पसंदीदा मशहूर दशहरी आम के जनक की कहानी भी बेजोड़ है। दशहरी का जन्मदाता (मदर प्लांट) करीब 300 साल पुराना हो गया है। यह विशाल पेड़ आज भी मौजूद है। करीब 1600 फीट क्षेत्रफल में फैला यह पेड़ पूर्णत: घना व घेरदार है। इसे कटीले तारों से घेरकर ‘संरक्षित पेड़’ का बोर्ड भी लगाया गया है। यह पेड़ काकोरी ब्लॉक में हरदोई रोड पर स्थित दशहरी गांव में है।

इस पेड़ के आम भी सबसे खास हैं। स्वाद में सबसे जुदा इस आम को जी भरकर खाया जा सकता है। दशहरी गांव के लोग कहते हैं कि यह पेड़ कब से गांव में है, इसकी जानकारी उनके बाप दादा तक को भी नहीं है। ज्यादातर लोग पैदा होने के बाद से ही इस पेड़ को इसी तरह से देख रहे हैं। खास बात यह है कि हर साल आम के मौसम में इस पेड़ में चाहे चार पांच फल ही आयें, पर आते जरूर हैं। कूड़ा प्लांट के निर्माण के समय यह पेड़ उसकी चपेट में आ रहा था, लेकिन ग्रामीणों ने संघर्ष कर इसे बचा लिया। इसके बाद जन प्रतिनिधियों से कह कर इसे संरक्षित कराया गया। इस पेड़ को विरासत का दर्जा भी मिला है। लखनऊ के एक आला अधिकारी के अनुसार, तीन सदी पुराना यह पेड़ दशहरी आम का जनक है। इसे दशहरी की उत्पत्ति मानी जाती है। मलिहाबाद को आम के लिए ही जाना जाता है। यहां दो लाख 70 हजार हेक्टेयर में दशहरी आम की बाग है, जिसमें 60 प्रतिशत कलमी दशहरी का क्षेत्र है। बहुत जल्द यहां राजधानी में आम महोत्सव शुरू होने वाला भी है।

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