Ranchi : रांची का आज का दिन इतिहास बन गया, जब झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने एक स्वप्न को वास्तविकता में बदलने की घोषणा की। अब राज्य को अपना खेल विश्वविद्यालय मिलेगा। यह घोषणा कोई औपचारिक घोषणा भर नहीं थी, यह उस भविष्य की दस्तक थी, जिसमें हर गांव से एक चैंपियन निकलेगा, हर टोले से एक विजेता। मंच सजा था – झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसायटी की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक का। पर जो बातें हुईं, वो सिर्फ मीटिंग की नहीं, आने वाले कल की गाथा थी।
मुख्य सचिव का आदेश स्पष्ट था, “राजगीर सहित देश के तमाम खेल विश्वविद्यालयों का अध्ययन करें और झारखंड की जरूरतों के अनुसार अपनी योजना बनायें।” यह महज एक निर्देश नहीं था, यह उस नींव की ईंट थी, जिस पर खड़ा होगा झारखंड का खेल भविष्य। खेलगांव के 200 एकड़ में फैले 10 स्टेडियम, 4 इनडोर और 6 आउटडोर अब सिर्फ इमारतें नहीं रह जायेगी, ये “चैंपियन फैक्ट्री” बनेंगी।
खेल और पढ़ाई साथ-साथ
4 से 5 साल के बच्चों को खेल अकादमी से जोड़ने की बात, अपने आप में क्रांतिकारी है। खेलगांव परिसर में ही प्लस-2 स्तर का स्कूल खुलेगा। अब खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के साथ शिक्षा भी मिलेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तभी बनते हैं, जब बुनियाद मजबूत हो। हमें नींव से शुरुआत करनी होगी। CCL ने स्पोर्ट्स एकेडमी में 5 मेगावाट सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव रखा। यह न सिर्फ बिजली की बचत करेगा, बल्कि खेलों में निवेश के लिये और रास्ते खोलेगा। बिजली की हर बचत, एक नई प्रतिभा के सपने को रोशनी देगी।
इस स्पोर्ट्स एकेडमी ने 2016 से अब तक तैयार किये हैं, 4 गोल्ड, 4 सिल्वर, 6 ब्रॉन्ज इंटरनेशनल लेवल पर, 74 गोल्ड, 70 सिल्वर, 118 ब्रॉन्ज नेशनल लेवल पर और 763 गोल्ड, 352 सिल्वर, 227 ब्रॉन्ज राज्यस्तरीय स्पर्धाओं में।लेकिन अब लक्ष्य और ऊंचा है – हर गांव से पदक लाना है।




