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Go-First को खरीदेंगे स्पाइसजेट के चेयरमैन, लगाई बोली…जानें

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Kohramlive : Go-First एयरलाइन की बोली लगनी शुरू हो गई है। स्पाइसजेट के MD अजय सिंह ने गो-फर्स्ट एयरलाइन को खरीदने के लिए बिजी बी एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ बोली लगाई है। एयरलाइन ने कहा कि अजय सिंह ने यह बोली अपनी पर्सनल कैपेसिटी से लगाई है। अगर डील पक्की हो जाती है तो स्पाइसजेट नई एयरलाइन के ऑपरेशन में मदद करेगी। जरूरी स्टाफ, सर्विस और इंडस्ट्री एक्सपर्टिज प्रोवाइड करेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गो फर्स्ट वाडिया ग्रुप की बजट एयरलाइन है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार 29 अप्रैल 2004 को गो फर्स्ट की शुरुआत हुई थी। नवंबर 2005 में मुंबई से अहमदाबाद के लिए पहली फ्लाइट उड़ान भरी थी।  एयरलाइन के बेड़े में 59 विमान शामिल हैं।  इनमें से 54 विमान A320 NEO और 5 विमान A320 CEO हैं। गो फर्स्ट 35 डेस्टिनेशन के लिए अपनी फ्लाइट ऑपरेट करता है। इसमें से 27 डोमेस्टिक और 8 इंटरनेशनल डेस्टिनेशन शामिल हैं। एयरलाइन ने साल 2021 में अपने ब्रांड नाम को गोएयर से बदलकर गो फर्स्ट कर दिया था। इस बीच स्पाइसजेट के MD अजय सिंह ने मीडिया से कहा, ‘मेरा विश्वास है कि गो-फर्स्ट में अपार संभावनाएं हैं और इसे स्पाइसजेट के साथ काम करने के लिए ऑपरेट किया जा सकता है। इससे दोनों कैरियर्स को फायदा होगा। गो फर्स्ट यात्रियों के बीच एक ट्रस्टेड और वैल्यूएबल ब्रांड है। इसके अलावा डोमेस्टिक और इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर स्लॉट भी है।

एयरलाइन पर 6,521 करोड़ रुपये बकाया

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गो फर्स्ट पर अपने लेंडर्स का 6,521 करोड़ रुपये बकाया है। एक्यूइट रेटिंग्स एंड रिसर्च ने 19 जनवरी की रिपोर्ट में कहा था कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का सबसे ज्यादा 1,987 करोड़ रुपये का एक्सपोजर था, वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा का 1,430 करोड़ रुपये, डॉयचे बैंक का 1,320 करोड़ रुपये और IDBI बैंक का 58 करोड़ रुपये बकाया था। गो फर्स्ट लगातार फ्लाइट्स सस्पेंड करने की डेट आगे बढ़ा रही है। खबर है कि फ्लाइट नहीं उड़ने के कारण उसके पास कैश की कमी हो गई और फ्यूल भरने के लिए भी पैसे नहीं बचे। एयरलाइन के CEO कौशिक खोना का दावा है कि इंजन की खराबी से कंपनी को बीते तीन साल में 1.1 बिलियन डॉलर यानी करीब 8.9 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

गो फर्स्ट को 60 दिनों का एक्सटेंशन मिला था

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने गो-फर्स्ट को कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को पूरा करने के लिए 60 दिनों का एक्स्ट्रा टाइम दिया था। ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि एयरलाइन की ओर से NCLT को बताया गया था कि तीन पार्टियों ने गो फर्स्ट को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

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