Ranchi : ”MSME कॉनक्लेव” में शिरकत करने वाले दिग्गज वक्ताओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था में MSME पारिस्थिति की तंत्र के महत्व पर जोर दिया, वहीं महिलाओं के समग्र विकास और भारत सरकार की यशस्विनी योजना के योगदान तथा पीएम विश्वकर्मा योजना की जागरूकता को बढ़ावा देने पर फोकस किया गया। राजधानी रांची के रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित ”MSME कॉनक्लेव” में मुख्य अतिथि की हैसियत से मौजूद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी उद्घाटन किया। वहीं, MSME मंत्रालय की राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे, झारखंड के उद्योग मंत्री सत्यानंद भोक्ता, MSME मंत्रालय के अपर सचिव डॉ रजनीश, झारखंड उद्योग विभाग के सचिव जितेन्द्र कुमार सिंह एवं MSME मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मर्सी एपाओ विशिष्ट अतिथि की हैसियत से मौजूद थी।
मुख्य अतिथि जीतन राम मांझी ने कहा कि पूरे देश में 20 प्रौद्योगिकी केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिसमें से एक का आज बोकारो में वर्चुअल मोड में शिलान्यास किया गया है। जिसकी अनुमानित लागत 200 करोड़ रूपये है। ये प्रौद्योगिकी केंद्र राज्य के एमएसएमई इकाईयों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, वहीं, युवाओं के कौशल विकास के लिए कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि पूरे देश में स्थापित हो रहे 100 विस्तार केंद्रों में से 2 विस्तार केंद्र की स्थापना झारखण्ड के ISM धनबाद एवं रांची के झारखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय में की जाने की स्वीकृति उनके मंत्रालय द्वारा दी गई है। उन्होंने अपनी खुशी का इजहार करते हुये कहा कि गुजरे 5 वर्षों में 30 लाख विश्वकर्माओं को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य मिला था, जबकि मात्र एक वर्ष के कम समय में ही 2.45 करोड़ लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं, वहीं, 18.75 लाख लोगों को तीसरे स्तर के सत्यापन उपरांत पंजीकृत किया जा चुका है। यशस्विनी अभियान महिला उद्यमियों को सशक्त उद्यमी निर्माता बनाने के लिए समग्र समर्थन प्रदान करने की एक पहल है। सार्वजनिक खरीद में एससी/ एसटी एवं महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से सार्वजनिक खरीद नीति के अनुपालन पर भी सरकार जोर दे रही है।उन्होंने रैम्प योजना के तहत झारखंड के उद्यमियों के विकास हेतु 70 करोड़ की राशि प्रदान करने की घोषणा की।
विशिष्ट अतिथि सुश्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि MSME सेक्टर देश की GDP के लगभग 30 प्रतिशत, विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 45 प्रतिशत एवं निर्यात क्षेत्र में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करता है। समाजिक-आर्थिक विकास में बड़ा योगदान करने के कारण इसे देश के रीढ़ की हड्डी कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। उन्होंने भारत सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना, महिला क्वायर योजना, यशस्विनी योजना, रैम्प योजना, पीएमएस योजना, पीएमईजीपी योजना आदि के बारे में विस्तृत रूप से बताया। उन्होंने यह भी बताया कि एनएसएसएच योजना के तहत 1.30 लाख एससी/ एसटी उद्यमियों को लाभ हुआ है, जिसमें से 7126 लाभुक झारखण्ड राज्य से हैं।
झारखंड के उद्योग मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने ”MSME कॉनक्लेव” की सराहना करते हुये कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना से झारखण्ड के विश्वकर्माओं को अपना जीवन स्तर सुधारने एवं उद्यमी के रूप में स्थापित होने का मौका मिलेगा। उन्होंने प्रतिभागियों को भारत सरकार की योजनाओं के बारे में इस कार्यशाला के माध्यम से प्रदान किये गये ज्ञान का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
अपने स्वागत भाषण में संयुक्त सचिव सुश्री मर्सी एपाओ ने ”MSME कॉनक्लेव” के मकसद एवं रूप-रेखा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस कॉनक्लेव को विश्वकर्माओं के जीवन स्तर की वृद्धि हेतु आवश्यक बताया। झारखंड उद्योग विभाग के सचिव जितेन्द्र कुमार सिंह ने झारखण्ड सरकार द्वारा MSME उद्यमियों के विकास हेतु चलाये जा रहे योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया एवं इस कॉनक्लेव में भाग ले रहे प्रतिभागियों से भारत सरकार की योजनाओं की जानकारी लेने एवं उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। MSME मंत्रालय के अपर सचिव डॉ रजनीश ने बदलते परिदृश्य और एमएसएमई को बाजार, ऋण, प्रौद्योगिकी, हरित और एमएसएमई की स्थिरता जैसी चुनौतियों के निवारण के लिए सहायता प्रदान करने के लिए मंत्रालय की पहल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बोकारो में टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना, जेड 2.0 के लांच, आईडिया हैकथॉन 4.0 के लांच एवं उद्यम पोर्टल पर 5 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई उद्यमियों के पंजीकरण की उपलब्धि के बारे में बताया। इस कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से लगभग 600 प्रतिभागियों जिसमें पी एम विश्वकर्मा कारीगर, 300 से ज्यादा महिला उद्यमियों, जेड एवं लीन स्कीम से संबंधित उद्यमियों ने हिस्सा लिया एवं कार्यशाला का लाभ उठाया।
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