Kohramlive : कभी हवाई जहाजों की ऊंचाई मापती थीं, आज जमीन पर कानून की लकीर खींचती हैं। IIT कानपुर की सुनहरी दीवारों से निकली एक लड़की, जिसे न्यूजीलैंड की चमक-धमक भी रोक नहीं सकी। सालाना 48 लाख के पैकेज वाली उस युवती ने जब अपनी आरामदायक विदेशी नौकरी छोड़कर देश लौटने का फैसला किया, तो शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि वो एक दिन कानून के लिये अड़ जाने वाली “सिंहनी” के नाम से जानी जायेगी। उत्तराखंड की शांत वादियों से निकलकर उत्तर प्रदेश के कानपुर की सड़कों पर कानून की परिभाषा बन चुकीं हैं अंजलि। 11 जनवरी 1993 को जन्मीं इस साधारण परिवार की बेटी के पास असाधारण जज्बा है। IIT कानपुर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, फिर बहुराष्ट्रीय तेल कंपनियों में नौकरी, 6 देशों में काम का अनुभव, मगर दिल में देश के लिये कुछ करने की तड़प, जो विदेश की चकाचौंध में भी बुझी नहीं।
जब देश सेवा का बुलावा आया
न्यूजीलैंड में रहते हुये जब अंजलि को लगा कि “अब बहुत हो चुका”, तो उन्होंने अपने कम्फर्ट जोन को लात मार दी। UPSC की तैयारी के लिये देश लौटीं। पहली बार असफल रहीं, लेकिन दूसरे प्रयास में इतिहास रच दिया, बनीं 2021 बैच की IPS अधिकारी। कानपुर नगर पुलिस कमिश्नरेट की ADCP अंजलि विश्वकर्मा, साइबर क्राइम से लेकर महिला अपराधों तक, हर मोर्चे पर पूरी शिद्दत से काम कर रही हैं। बाबूपुरवा क्षेत्र में बतौर ACP रहते हुये उन्होंने कई जघन्य मामलों को सुलझाया और “सख्त लेकिन संवेदनशील अफसर” की छवि बनाई।
जब नियमों के आगे न झुकी
कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम एक हाई-प्रोफाइल क्रिकेट मैच, और उसी भीड़ के बीच कानून को झुकाने की कोशिश। बीजेपी एमएलसी अरुण पाठक अपने गनर को स्टेडियम में ले जाना चाहते थे। लेकिन अंजलि ने उन्हें रोक दिया। “सुरक्षा नियमों का पालन सभी पर लागू होता है”, उन्होंने साफ शब्दों में कहा। जब बहस तेज हुई, तो उन्होंने कहा, “मैं इन्हें पहले भी एक कार्यक्रम में डील कर चुकी हूं।” उनके इस बयान पर राजनीति गरमाई, लेकिन उन्होंने निडरता के साथ अपना काम किया, न तो दबाव में आईं, न ही अनुशासन से डिगीं। यह वीडियो सोसल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। एक सोसल मीडिया य़ूजर ने लिखा, “जब सिस्टम झुकता नहीं, तब भरोसा बनता है…” दूसरे ने लिखा, “ऐसी अफसर हर जिले को मिलनी चाहिये, जो रैंक नहीं, फर्ज निभायें।”








