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“शहादत को सलाम”, रांची में गूंजी वीरों की गाथा

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Ranchi : झारखंड की धरती पर आज फिर एक दिन ऐसा था, जब परेड मैदान में कदमों की थाप के साथ आंखों में नमी और दिल में गर्व था। “पुलिस संस्मरण दिवस परेड” के मौके पर जैप 1 परिसर में देश के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस समारोह में झारखंड के DGP समेत पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारी, जवान और परिवारजन मौजूद रहे। हर किसी के चेहरे पर एक ही संदेश था, “शहीद मरा नहीं करते, वो देश की सांसों में बस जाते हैं।” बीते 1 सितंबर 2024 से 31 अगस्त 2025 तक देशभर की पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स के 191 जवानों ने कर्तव्यपथ पर अपने प्राण न्यौछावर किये। इनमें झारखण्ड के आरक्षी (361) सुनिल धान भी शामिल हैं,  जो 12 अप्रैल 2025 को चाईबासा के रातामाटी गांव के जंगलों में माओवादी हमले के दौरान IED ब्लास्ट में शहीद हुये। वो झारखंड जगुआर के सिपाही थे। इस अवसर पर झारखंड पुलिस के सभी पदाधिकारियों और कर्मियों ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन समर्पित किये। मंच से यह संकल्प भी लिया गया कि “हम अपने शहीदों के परिवारों के साथ हर पल खड़े रहेंगे, क्योंकि उनकी कुर्बानी ही हमारी प्रेरणा है।” सर्वाधिक 23 शहीद BSF से, 16 छत्तीसगढ़ पुलिस से, 14 जम्मू-कश्मीर पुलिस से, और 12 पश्चिम बंगाल पुलिस से रहे। हर नाम के पीछे एक कहानी है,  कर्तव्य, साहस और देशप्रेम की ऐसी कहानी, जिसे समय कभी मिटा नहीं सकता। जब शहीदों के नामों की घोषणा हुई, पूरा मैदान कुछ पलों के लिये मौन और गर्व के संग ठहर गया। राष्ट्रध्वज की छांव में खड़े जवानों की आंखों में “सेवा, समर्पण और शौर्य” का व्रत झलक रहा था।

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