चाईबासा : दर-दर की ठोकर खा रही थी रुकमिणी सालों से। अब जाकर मिले उनके पति और भाई। रुकमिणी 15 साल पहले असम से भटकते-भटकते पश्चिमी सिंहभूम के किरीबुरु आ गई। यहां नुआमुंडी के मीना बाजार बस स्टैंड के पास रह रही थी। रहना क्या, सड़क पर जिंदगी काट रही थी। दिमागी हालत स्थिर नहीं थी। इससे अपने घर से निकल गई और फिर जमाने की ठोकरें खाते-खाते पहुंच गई नुआमुंडी। मगर कहते हैं न कि विधाता जब अच्छा सोचता है तो फिर अनजाने लोग भी आपकी मदद के लिए आगे बढ़ते हैं।
ऐसा ही हुआ रुकमिणी के साथ। इसमें उसके रहनुमा बने मेघाहातुबुरु खदान के सेल अधिकारी सीताराम महतो और ओपी चौधरी। उन्होंने रुकमिणी को उसकी बदहाली की हालत में बस स्टैंड पर देखा। उन्होंने उसकी फोटो लेकर उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। सीआईएसएफ के अधिकारी मंजीत कुमार ने इस फोटो को शेयर किया।
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फोटो असम में जमकर हुआ शेयर
फोटो शेयर होते-होते असम के जवानों तक भी पहुंचा और यह असम में वायरल हो गया। फोटो को असम के एक प्रतिष्ठित परिवार के लोगों ने देखा। उन्होंने पहचाना कि यह तो उनके घर की महिला है, जो 15 साल पहले अर्धविक्षिप्त हालत में घर से लापता हो गई थी। उसकी काफी खोजबीन की गई थी, पर नहीं मिली थी। उन्हें 70 प्रतिशत विश्वास था कि यह वही है, पर मिलने पर ही सच्चाई सामने आएगी।
फोटो देख किरीबुरु पहुंचे पति और भाई
फिर रुकमिणी के पति फुनि डेका और भाई जगत ठाकुरिया सत्ताईस दिसंबर रविवार को लगभग दोपहर दो बजे नुआमुंडी, किरीबुरु पहुंचे। उनके पहुंचते ही स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। पहले उन लोगों ने साफ मना कर दिया कि यह रुकमिणी नहीं है। जब लोगों ने दोनों से अलग-अलग सवाल किए, तो उनके जवाव एक ही मिलने लगे। फिर भी रुकमिणी की ऐसी हालत देखने के बाद उसे लेने को तैयार नहीं थे। तबतक किरीबुरु थाना प्रभारी अशोक कुमार भी वहां आ गए। पुलिस को आया देख दोनों जीजा-साले ने तुरंत मान लिया कि यह रुकमिणी ही है और अब वे उनका इलाज कराएंगे और देखरेख करेंगे।
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किरीबुरु के लोगों में खुशी की लहर
इसके बाद सेल अधिकारी सीताराम महतो और सीआईएसएफ जवान मुन्ना कुमार की मदद से उन्हें किरीबुरु अथितिगृह में भेजा गया। अठाइस दिसंबर सोमवार को सुबह लगभग दस बजे रुकमिणी के पति और भाई के लिखित आश्वासन के बाद उन्हें सौंप दिया जाएगा। इससे किरीबुरु के लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गयी। सीताराम महतो और ओपी चौधरी ने इससे पहले भी चार बार अपनों से बिछड़े लोगों को उनके परिवार से मिलवाया है।






