Palamu : झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) कभी जिसे नक्सल आतंक और सन्नाटे की वजह से “खोया हुआ वन” कहा जाने लगा था, अब एक बार फिर बाघों की दहाड़ से गूंज उठा है। कैमरा ट्रैप में लगातार आ रही तस्वीरें बता रही हैं कि पलामू का जंगल अब जाग चुका है। 2021 से लेकर सितंबर 2025 तक, यहां सात बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है, तीन उत्तर में, दो दक्षिण में और दो रहस्यमयी बाघ, जिनकी लोकेशन फिलहाल वन विभाग की खोज में है।
वन विभाग के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि ये बाघ लगातार शिकार कर रहे हैं और कोर एरिया में स्थायी मूवमेंट में हैं। सुरक्षा कारणों से सटीक लोकेशन साझा नहीं की जा सकती, लेकिन यह तय है कि पलामू अब फिर से बाघों का घर बन गया है। वन विभाग ने इन संवेदनशील इलाकों में हाई-क्वालिटी कैमरे लगाये हैं, जहां हर दहाड़, हर कदम रिकॉर्ड हो रहा है। 1,149 वर्ग किलोमीटर में फैला यह टाइगर रिजर्व 2018 में एक भी बाघ से खाली था। लेकिन अब, हर साल
एक-एक कर जंगल के असली बादशाह लौटे हैं। बहुत जल्द ही PTR में नई बाघ गणना शुरू होगी और इस बार वनकर्मी उन नक्सल प्रभावित इलाकों तक भी पहुंचेंगे, जहां पहले कदम रखना असंभव माना जाता था।






