Ranchi : हजारों मील दूर, अफ्रीका के देश ट्यूनीशिया की तपती रेतों में जब उम्मीद की किरण धुंधली पड़ने लगी थी,
तभी झारखंड से एक आवाज उठी, वह थी CM हेमंत सोरेन की, जिन्होंने अपने प्रवासी बेटों की पुकार सुनी और वतन वापसी की राह खोल दी। CM के त्वरित हस्तक्षेप के बाद अब ट्यूनीशिया में फंसे 48 प्रवासी कामगारों की स्वदेश वापसी सुनिश्चित हो गई है। लार्सेन एंड टुब्रो लिमिटेड ने न केवल सभी की हवाई टिकटों की व्यवस्था की है, बल्कि ₹30 लाख रुपये का भुगतान भी शुरू कर दिया है। अब वे परदेस नहीं, अपने गांव की मिट्टी, अपने घर की चौखट पर लौटेंगे, जहां बच्चे बाहें फैलाये इंतजार कर रहे हैं।
तीन जिलों के बेटे, एक दर्द
इन 48 कामगारों में हजारीबाग के 19, गिरिडीह के 14, और बोकारो के 15 लोग शामिल हैं। उन्हें PCL Prem Power Construction Ltd. के जरिये ट्यूनीशिया भेजा गया था, जहां तीन महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण वे गहरे आर्थिक संकट में फंसे थे। जब यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंची, उन्होंने राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिये। विभाग ने ट्यूनीशिया में फंसे सभी कामगारों से संपर्क किया और भारत सरकार व कंपनी के सहयोग से उनकी वापसी व बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी। यह
झारखंड की संवेदनशीलता, मानवता और अपने लोगों के प्रति समर्पण की कहानी है। सरकार का काम सिर्फ शासन नहीं, संरक्षण भी है। यही संदेश इस पूरी पहल ने दिया है। 4, 5 और 6 नवंबर को जब ये 48 चेहरे अपने देश की धरती पर उतरेंगे, तो केवल विमान नहीं, उम्मीदें, मुस्कानें और विश्वास भी लौटेंगे।






