Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा में जब आसमान बादलों से घिरा था, तो न्याय के मंदिर अदालत में उम्मीद की दीपशिखा जली। झालसा रांची के निर्देशानुसार व जिला एवं सत्र न्यायाधीश (गढ़वा) के नेतृत्व में,”विशेष मध्यस्थता शिविर” ने उन रिश्तों को जोड़ा, जो अदालतों की दीवारों में नहीं, संवाद की छांव में सुलझते हैं। 11 पारिवारिक वादों का निपटारा किया गया। मनभेद से समाधान तक। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कौशल किशोर झा की देखरेख में मध्यस्थता के जरिये 11 पारिवारिक झगड़ों को आपसी सहमति और समझदारी से सुलझा लिया गया। कुछ पक्षकार बारिश के कारण उपस्थित नहीं हो सके, फिर भी मध्यस्थों की टीम ने प्रयास नहीं रोके। कुछ मामले अंतिम चरण में हैं, जल्द ही सुलह की रौशनी वहां भी पहुंचेगी। मार्गदर्शक बनीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव निभा रंजना लकड़ा ने कहा कि “हर वादी-प्रतिवादी को संवेदनशीलता से सुनिये, उन्हें समझाइये कि मुकदमा नहीं, समझौता सच्चा समाधान है।”
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