Kohramlive : अब जंगली हाथियों के रेलवे ट्रैक पर आते ही इसका संकेत पायलट को मिल जायेगा, पायलट ट्रेन का हॉर्न बजाना शुरू कर देंगे। वहीं, हाथी के करीब आने से पहले ही ट्रेन रोक दी जायेगी, जिससे हाथी के कट कर मर जाने की घटनाओं पर रोक लगेगी। भारतीय रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस नई तकनीक का नाम ”गजराज” रखा है। नई तकनीक का इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है। खबर है कि बीते एक दशक में करीब 199 हाथियों की मौत ट्रेन से कट जाने के चलते हो गई। नई तकनीक से करीब 14 एलीफैंट कोरिडोर कवर हो चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कई बार हाथियों के झुंड ही ट्रैक पर आ जाते हैं, लोको पायलट द्वारा ट्रेन रोकते-रोकते हाथी चपेट में आ जाते हैं। सबसे ज्यादा घटनायें पश्चिम बंगाल सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में होती हैं। गुजरे एक दशक में पश्चिमी बंगाल में 55, ओडिशा में 14, असम में 30, उत्तराखंड में 9, त्रिपुरा में 1 एवं यूपी में 1 हाथी की मौत हो जाने की खबर है। रेलवे ने इस तरह की घटनायें रोकने के लिए नई तकनीक का ईजाद किया है। जिसका नाम ‘गजराज’ है। इसका पायलट प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर में नार्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे करीब 70 किमी. रेलवे ट्रैक न्यू अलीपुर द्वार और लामडिंग सेक्शन के बीच किया है।
ऐसे काम करेगा ‘गजराज’
नार्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के GM अंशुल गुप्ता ने मीडिया को बताया कि रेलवे ट्रैक के किनारे- किनारे आप्टिकल फाइबर बिछाकर सेंसर लगाए गये हैं, जो कंट्रोल रूम, रेलवे स्टेशन और रेडियो कम्यूनिकेशन के सहारे इंजन से कनेक्ट है। इस तरह जब हाथी ट्रैक पर आयेगा, उसके दबाव से कंपन पैदा होगा, जिसकी सूचना कंट्रोल रूम, स्टेशन मास्टर और लोको पायलट के पास पहुंचेगी। वहीं, उसी समय अलार्म भी बजेगा, इस तरह तीनों जगह एक साथ सूचना पहुंच सकेगी। इससे यह भी पता चलेगा कि कंपन कहां हुआ है, लोको पायलट उसी के अनुसार ट्रेन की स्पीड कम करेगा या रोकेगा।
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