spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

राष्ट्रपति शासन खत्म, ये बने नये CM…

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : करीब एक साल बाद मणिपुर में एक बार फिर लोकतांत्रिक सरकार का रास्ता साफ हो गया है। नई सरकार के गठन से पहले बुधवार को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया। वहीं मार्शल आर्ट के धुरंधर मैतेई समुदाय के युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्यपाल के सामने CM पद की शपथ लेकर राज्य की बागडोर संभाली। उनके साथ भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और एनपीएफ के एल डिखो उपमुख्यमंत्री बने। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 356 (2) के तहत 13 फरवरी 2025 को लागू की गई राष्ट्रपति शासन की घोषणा को चार फरवरी 2026 से रद्द किया जाता है। इसके साथ ही 60 सदस्यीय विधानसभा फिर से सक्रिय हो गई है, जिसका कार्यकाल वर्ष 2027 तक है।

सरकार बनाने का दावा किया

राष्ट्रपति शासन हटने से पहले ही NDA विधायक दल के नेता खेमचंद सिंह ने सरकार बनाने का दावा ठोक दिया था। मणिपुर भाजपा अध्यक्ष ए शारदा देवी ने बताया कि खेमचंद सिंह के नेतृत्व में NDA नेताओं ने इंफाल स्थित लोक भवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश किया। खास बात यह रही कि कुकी-जो बहुल जिलों चुराचांदपुर और फेरजावल के दो विधायक भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे, जिसे राजनीतिक संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। भाजपा अध्यक्ष ए शारदा देवी ने पत्रकारों से कहा कि हम नये विधायक दल के नेता और भाजपा पर्यवेक्षक तरुण चुग की मौजूदगी में राज्यपाल से मिले। NDA ने मणिपुर में लोकप्रिय और स्थिर सरकार बनाने का दावा किया है। इससे पहले मंगलवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में मणिपुर के विधायकों की बैठक हुई, जहां खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया। भाजपा महासचिव तरुण चुग ने उन्हें बधाई देते हुये X पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन में आपका अनुभव, प्रतिबद्धता और मजबूत नेतृत्व मणिपुर के लोगों की उम्मीदों को पूरा करेगा।”  वहीं, सात बार के वरिष्ठ विधायक गोविंदास को राज्य का गृह मंत्री बनाये जाने की प्रबल संभावना है।

हिंसा के बाद लगा था राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य की कमान केंद्र के हाथों में चली गई। दिसंबर 2025 में गृह मंत्रालय ने मणिपुर की जातीय हिंसा की जांच कर रहे आयोग को एक और विस्तार दिया था। आयोग को 20 मई 2026 से पहले रिपोर्ट सौंपने का निर्देश है। यह आयोग 3 मई 2023 से शुरू हुई हिंसा, उसके कारणों और प्रशासनिक प्रतिक्रिया की जांच कर रहा है।

विधानसभा का गणित

60 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल भाजपा के 37 विधायक, एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5, कांग्रेस के 5, कुकी पीपुल्स अलायंस के 2, जेडीयू का 1 एवं 3 निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट विधायक के निधन के कारण खाली है।
भाजपा ने 2022 चुनाव में 32 सीटें जीती थीं, बाद में जद(यू) के पांच विधायक भाजपा में शामिल हो गये।

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

बहन को बहुत समझाया, नहीं मानी तो मार डाला…

UP : कभी जिस भाई की कलाई पर बहन...

अमेरिका-ईरान रिश्तों में पिघली बर्फ, शांति समझौते पर डिजिटल मुहर…

Kohramlive : दशकों से अविश्वास, टकराव और तनाव की...

हजारीबाग में एक ही रात में 23 वांटेड धरा गये…

Hazaribagh : हजारीबाग के पुलिस कप्तान अमन कुमार के...

मैदान पर भड़के वैभव सूर्यवंशी, श्रीलंकाई खिलाड़ियों से हुई तीखी नोकझोंक…

Kohramlive : दांबुला में खेले गये भारत-ए और श्रीलंका-ए...