New Delhi : संध्या का सूरज लाल था, वैसा ही लाल, जैसा किसी मां के माथे से मिटा दिया गया सिंदूर होता है। देश की बेटियां उदास थीं, भारत मां के आंचल में आंधी थी, और अंधेरे में छुपे भेड़िए एक बार फिर कायरता के पंजे दिखा चुके थे। मगर उन्हें शायद यह नहीं पता था कि अब यह भारत 1965 वाला नहीं, 2025 वाला भारत है, जो सिर्फ सहता नहीं, जवाब देना जानता है। 6 मई की वो रात… जब ‘सिंह’ जागा था। PM नरेंद्र मोदी की आंखों में उस रात आंसू नहीं थे, अंगार था। उन्होंने आकाश की ओर देखा और केवल इतना कहा,”अब चुप नहीं रहना है, अब जवाब देना है, सिंदूर का बदला सिंदूर से ही लिया जायेगा।” और बस, एक आदेश गया, जो बना, “ऑपरेशन सिंदूर”। PM मोदी ने जब देश को संबोधित किया, तो वो कोई भाषण नहीं था, वो तो एक घोषणापत्र था, आतंक के खिलाफ अंतिम निर्णायक युद्ध का। “अगर पाकिस्तान से बात होगी… तो केवल पीओके पर होगी। अगर दुश्मन खून बहायेगा, तो पानी भी रोक दिया जायेगा।
अगर मिसाइलें भेजोगे, तो हम सीना चीर देंगे।” PM मोदी ने कहा कि “100 से अधिक आतंकियों को मौत मिली, PM मोदी बोले –“हमने जवाबी कार्रवाई स्थगित की है, रोकी नहीं। पाकिस्तान का हर कदम अब निगरानी में है। हर साजिश अब अंत बनकर लौटेगी।” यह कोई सैन्य कार्रवाई भर नहीं थी, यह न्याय की अखंड प्रतिज्ञा थी। सिर्फ दुश्मन का विनाश नहीं हुआ, एक नया विश्वास पैदा हुआ कि भारत अब आतंक पर मौन नहीं, आक्रामक होगा। अब “सिंदूर” सिर्फ साज नहीं, एक संकल्प है। PM मोदी ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अब एक न्यू नॉर्मल है। भारत को कोई आंख दिखायेगा, तो वो आंख नहीं बचेगी। आतंक और टॉक साथ नहीं चलेंगे। और ये देश भूलता नहीं, फिर चाहे वो सिंदूर हो, सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयर स्ट्राइक।”
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