Hazaribagh(Sunil Sahu) : झारखंड की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बसे एक छोटे से गांव बिरहोर टोला, पगार में बीते दो दिन उम्मीद की एक नई सुबह लेकर आए। 11 और 12 जुलाई को, जब NTPC चट्टी बरियातू कोल माइनिंग प्रोजेक्ट की टीम वहां पहुंची, तो साथ में कुछ दवाइयां नहीं लाई, बल्कि भरोसे की वो रौशनी थी, जिसकी टकटकी लगाए इस विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) ने न जाने कब से राह देखी थी।
बिरहोर समुदाय जो अब भी जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है। उनके लिए यह दो दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण शिविर सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनेपन की एक झलक था। NTPC की CSR टीम और डॉक्टर्स ने गांव में एनीमिया, कुपोषण और संक्रमण जैसे छिपे हुए रोगों की पहचान करने में मदद की।
शुरुआत में लोगों में हिचक थी, पर जब भरोसे की भाषा बोली गई, तो 48 ग्रामीण (41 वयस्क और 7 बच्चे) आगे आए और स्वास्थ्य जांच करवाकर एक नई शुरुआत की इबारत लिखी।














