Kohramlive : सरकार ने एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने पूरे बैंकिंग जगत में हलचल मचा दी। अब तक बंद दरवाजा खुल गया है और वो भी सीधे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ऊपरी मंजिल तक। सरकार ने तय किया है कि अब SBI और अन्य 11 सरकारी बैंकों में शीर्ष पदों पर सिर्फ सरकारी अधिकारियों का नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के अनुभवी बैंकरों का भी अधिकार होगा। अब SBI में चार में से एक प्रबंध निदेशक (MD) पद निजी या अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों से आये उम्मीदवारों के लिये खुला रहेगा। यह नियम सिर्फ SBI तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया जैसे सभी बड़े सरकारी बैंकों में लागू होगा।
कौन बन सकता है नया ‘बैंक बॉस’?
निजी क्षेत्र के उम्मीदवारों को इन पदों के लिए मौका मिलेगा, अगर उनके पास कम से कम 18 साल का अनुभव हो,
जिसमें 12 साल बैंकिंग और 3 साल वरिष्ठ प्रबंधन में कार्य का रिकॉर्ड हो। सरकार का मानना है कि इस कदम से सरकारी बैंकों में नई ऊर्जा और सोच आयेगी। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और फैसले अधिक प्रोफेशनल व परिणाम-केन्द्रित होंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि सार्वजनिक बैंक अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि प्रदर्शन की मिसाल बनें। हालांकि, ये फैसला सरकारी बैंकिंग अधिकारियों के लिये दरवाजा बंद नहीं करता। वे भी इन पदों के लिये आवेदन कर सकेंगे। यह बदलाव “योग्यता और अनुभव” को “वरिष्ठता” से ऊपर रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
एक नई बैंकिंग संस्कृति की शुरुआत
SBI में जैसे ही यह नियम लागू होगा, एक MD पद रिक्त माना जायेगा, जिसे इस नई प्रणाली के तहत भरा जायेगा।
कहा जा रहा है कि यह भारत के बैंकिंग इतिहास में “नई शुरुआत की घंटी” है ,जहां अब सरकारी और निजी सोच मिलकर भविष्य के बैंकिंग भारत का चेहरा तय करेगी।














