Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा की हवाओं में एक नई उमंग थी, एक नया सवेरा दस्तक दे रहा था। नीलांबर-पीतांबर बहुद्देशीय सांस्कृतिक नगर भवन में जब आंगनबाड़ी सेविकायें और महिला पर्यवेक्षिकाएं जमा हुईं, तो उनके चेहरों पर नई उम्मीद की झलक थी। ये वे महिलाएं थीं, जो अपने कंधों पर नन्हे भविष्य की नींव रखती हैं। जो पोषण की थालियों से लेकर शिक्षा की रौशनी तक, हर जिम्मेदारी को निभाती हैं। आज, उन्हें उनके काम की सबसे बड़ी सौगात मिली स्मार्टफोन।
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की इस पहल का असल मकसद सिर्फ तकनीक को थमाना नहीं था, बल्कि उन हाथों को सशक्त बनाना था, जो अब तक कागजों और फाइलों में उलझे रहते थे। अब हर योजना, हर रिपोर्ट बस एक स्पर्श की दूरी पर होगी। आधार वेरीफिकेशन से लेकर पोषण योजना की मॉनिटरिंग तक, अब उन्हें किसी दफ्तर की चौखट पर बार-बार नहीं जाना होगा। जब जिला समाज कल्याण पदाधिकारी प्रमेश कुशवाहा और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी संजय प्रसाद ने सेविकाओं के हाथों में स्मार्टफोन थमाया, तो उनकी आंखों में चमक थी। कोई इसे अपने बच्चों की पढ़ाई में मददगार मान रही थी, तो कोई इसे गांव की महिलाओं के लिये वरदान समझ रही थी।
स्मार्टफोन लेने के बाद आंगनबाड़ी सेविका विद्यावती कुमारी की आंखें छलक आईं। बोली, “पहले हर रिपोर्ट के लिये घंटों मेहनत करनी पड़ती थी, कई बार नेटवर्क और संसाधनों की दिक्कत होती थी। अब ये फोन हमारे काम को आसान बना देगा। हमारी मेहनत का हर आंकड़ा अब सरकार तक सीधे पहुंचेगा।” महिला पर्यवेक्षिका गीता कुमारी के शब्दों में गर्व था— “अब पोषण योजना से जुड़ी हर जानकारी, लाभार्थियों की मॉनिटरिंग, बच्चों की सेहत का डाटा, सब कुछ हमारे हाथ में होगा। डिजिटल क्रांति के इस कदम से हमें वो ताकत मिल रही है, जिसकी हमें वर्षों से जरूरत थी।”






