Ormanjhi(Kuldeep/Amitabh) : माय-बाप के ईंट भट्ठे में तपते-झुलसते बदन, ईंट की पथाई और ढुलाई में ढलती जिंदगी। उनके छोटे-छोटे बच्चों का बचपन उनसे छिन गया। अपना गांव, टोला-मोहल्ला यहां तक स्कूल तक छूट गया। पढ़ाई-लिखाई तक छूट गई। गांव में मॉडल स्कूल बना था, तमन्ना थी पढ़-लिख कुछ अलग करेंगे, पर तकदीर उन्हें यहां खींच लाई। सरकार के सपने में भी गहरा खुरेंच लगा। सरकार का सपना और मकसद है कि एक-एक छौउवा और बच्चियां पढ़े-लिखे। हाई एजुकेशन हासिल करें। दुखद पहलू यह कि पढ़ाई-लिखाई से कोसों दूर हो गये कुछ बच्चों की जिंदगानी ईंट भट्ठा में कट रही। ये बच्चे राजधानी रांची से सटे ओरमांझी और अनगड़ा क्षेत्र के ईंट भट्ठों में काम करने वाले अपने माय-बाप से साथ शेष जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। सुनें, क्या बोल गये बच्चे…
इसे भी पढ़ें :देवघर में भोलेबाबा के शीघ्र दर्शन कूपन की बढ़ी कीमत… जानें क्यों
इसे भी पढ़ें :पंचतत्व में विलीन हुये पूर्व PM, किसने दी मुखाग्नि… जानें
इसे भी पढ़ें :बिना राशन कार्ड के अनाज उठाने का आया नया तरीका… जानें
इसे भी पढ़ें :इन जगहों पर कड़ाके की ठंड पड़ने के आसार, अलर्ट जारी…
इसे भी पढ़ें :बातों और यादों में जिंदा रहेंगे पूर्व PM, तीनों बेटियां काबिल…
इसे भी पढ़ें :डॉ मनमोहन इकलौते ऐसे PM थे, जिनके हस्ताक्षर वाला नोट चला
इसे भी पढ़ें :पहाड़ों का सीना चीर यहां सब हो रहे मालामाल… देखें वीडियो
इसे भी पढ़ें :नाले में गिरी बस, मची चीख-पुकार






