Kohramlive : मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा एक साथ ईरान पर हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़ गये हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ पूरे मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइल हमले किये हैं। बताया जा रहा है कि ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के 7 प्रमुख सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। कुवैत स्थित अली अल-सालेम एयर बेस अमेरिका के लिये अहम रसद और सैन्य परिवहन केंद्र माना जाता है। ईरानी हमलों के मद्देनजर कुवैत ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, हालांकि मिसाइल हमलों की पुष्टि हुई है। बहरीन में मौजूद अमेरिका के फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस पर भी ईरान ने हमले किये हैं। यही बेस खाड़ी क्षेत्र और अरब सागर में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी का मुख्य केंद्र है। कतर में स्थित अल उदईद एयर बेस मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है, जहां 10 हजार से अधिक सैनिक तैनात हैं। इस रणनीतिक ठिकाने को भी ईरानी मिसाइलों से निशाना बनाया गया। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के पास स्थित अल धफरा एयर बेस, जहां से अमेरिका अपने F-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों का संचालन करता है, उसे भी हाई अलर्ट पर रखा गया है और ईरानी हमले की सूचना है। ईरान ने इराक, यमन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। सऊदी अरब ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है।
इजरायल में इमरजेंसी, सायरन से गूंजा देश
ईरानी हमलों के बाद इजरायल में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया है। देशभर में सायरन बजाये जा रहे हैं और नागरिकों को मोबाइल अलर्ट के जरिये सुरक्षित स्थानों के पास रहने के निर्देश दिये गये हैं। इजरायल ने एहतियातन अपनी हवाई सीमा भी बंद कर दी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह सैन्य टकराव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।








