Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में आज एक बैठक नहीं, बल्कि आदिवासी भविष्य को संवारने की संजीदा कोशिश हुई। आदिवासी कार्य मंत्री चमरा लिंडा ने योजनाओं की समीक्षा करते हुये शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार को लेकर कई ठोस निर्देश दिये। ताकि सरकार की रोशनी आदिवासी घरों की देहरी तक पहुंचे, न कि फाइलों में ही रह जाये।
अब हर होनहार को मिलेगा उसका हक
मंत्री ने कहा कि “हर मेधावी आदिवासी छात्र को विदेशों तक पढ़ने का हक है।” ‘मरांग गोमके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना’ के तहत छात्रों का जल्द चयन हो। यह पहला बड़ा निर्देश था। साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को उत्कृष्ट कोचिंग संस्थानों में भेजने की व्यवस्था भी तेज की जायेगी। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी साइकिल योजना को सभी जिलों में तेज़ी से लागू किया जायेगा ताकि स्कूल की राह अब लंबी न लगे और बेटियां वक्त पर स्कूल पहुंचे। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का आदेश देते हुये मंत्री ने कहा कि “आदिवासी युवा सिर्फ लाभार्थी नहीं, आत्मनिर्भर उद्यमी बनें यही असली विकास है।”
स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें पहाड़ों और पठारों तक
राज्य के 16 ग्रामीण कल्याण अस्पतालों के बेहतर संचालन पर भी खास जोर दिया गया ताकि गांव की ज़रूरतें अब शहर का इंतजार न करें। मंत्री लिंडा ने साफ निर्देश दिया कि हर योजना की निगरानी और समीक्षा तय समय पर हो, ताकि लाभार्थी सिर्फ लिस्ट में नहीं, असल ज़िंदगी में योजना का हिस्सा बनें।








