Ranchi (Pawan/Bhawna) : दावा है कि इस गाड़ी में बैठा इंसान कोई मामूली नहीं। सरकार ने इसके सिर पर पूरे एक करोड़ रूपये का ईनाम रखा था। नाम है प्रशांत बोश उर्फ किसन दा। पुलिस फाइल में इसके नाम से पहले जुड़ा है कुख्यात माओवादी किशन दा उर्फ मनीष उर्फ बुढ़ा। पश्चिम बंगाल के 24 परगना के यादवपुर गांव में रहनेवाले किशन दा की तलाश वर्षों से कई राज्यों की पुलिस को थी। 89 से ज्यादा नक्सली वारदातों में इनकी खोज पुलिस को थी।
किशन दा को खोज निकालने में नाकाम होने के बाद शासन प्रशासन ने किशन दा के सिर पर पूरे एक करोड़ रुपये का ईनाम रखा। इसके बावजूद पुलिस को इनकी भनक तक नहीं मिल रही थी। कई सुरक्षा एजेंसी फरार किशन दा की टोह में लगी थी। डीजीपी नीरज सिन्हा ने जब अपना योगदान दिया तो उन्होंने कोई लंबी चौड़ी कुछ भी बातें नहीं कही। लगातार कई नक्सली सलाखों के पीछे डाल दिये गये। वहीं कई मार गिराये गये। कई छोटे बड़े अपराधी गिरोह के कमर की हड्डी तोड़ कर रख दी। कुख्यात प्रशांत बोश की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।















