सिपाही भर्ती में ‘स्कॉलर गैंग’ का बड़ा खुलासा…

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Bihar : वर्दी पहनने का सपना दिखाकर लाखों रुपये की कमाई, असली अभ्यर्थी की जगह मेधावी छात्रों को परीक्षा में बैठाना और बायोमेट्रिक सिस्टम में भी सेंधमारी। बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में सामने आया यह खुलासा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। लेकिन हकीकत यह है कि भर्ती प्रक्रिया को हाईटेक तरीके से चकमा देने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों को आज जेल भेज दिया। ये गिरफ्तारियां मुंगेर के तारापुर और अरवल जिले के विभिन्न इलाकों से की गई हैं। पूछताछ में जो जानकारी सामने आई है, उसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है।

3 से 5 लाख में लिखित परीक्षा पास कराने का दावा

जांच में खुलासा हुआ है कि भर्ती माफिया अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर लिखित परीक्षा पास कराने का ठेका लेते थे। इसके लिये तीन से पांच लाख रुपये तक लिये जाते थे। गिरोह का दावा होता था कि अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया के शुरुआती चरण में कोई परेशानी नहीं होगी। इतना ही नहीं, पूरी भर्ती प्रक्रिया पार कराने के लिये आठ लाख रुपये तक का पैकेज भी तय किया जाता था। खुलासा हुआ है कि गिरोह मेधावी छात्रों को तलाशकर उन्हें ‘स्कॉलर’ के रूप में इस्तेमाल करता था। इन छात्रों को एक से दो लाख रुपये देकर असली अभ्यर्थी की जगह परीक्षा में बैठाया जाता था। इसके लिये अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड में फोटो बदलने से लेकर परीक्षा केंद्र तक प्रवेश दिलाने की पूरी व्यवस्था पहले से कर ली जाती थी।

बायोमेट्रिक जांच में खुली पोल

इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे चौंकाने वाला पहलू बायोमेट्रिक प्रक्रिया में कथित मिलीभगत का है। जांच में सामने आया कि कुछ बायोमेट्रिक कर्मियों की मदद से स्कॉलर को आसानी से परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया जाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) के दौरान फोटो, हस्ताक्षर, पैराग्राफ राइटिंग और बायोमेट्रिक मिलान में भारी गड़बड़ियां सामने आईं। जांच आगे बढ़ी तो भर्ती घोटाले की परतें खुलती चली गईं। यह मामला केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान 563 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और पहचान में अनियमितता मिलने के बाद सात अप्रैल 2025 को सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में अबतक 88 लोग जेल जा चुके हैं।  SI अमृता प्रियदर्शनी के आवेदन पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और बिहार लोक परीक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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