Kohramlive : बस्तर के पहाड़ों से उठती धुंध के बीच, पहली बार 25 साल पुरानी धुंध छंटी है। सुरक्षा बलों के रिकॉर्ड में माड़वी हिड़मा की अब तक बस एक धुंधली तस्वीर थी, वो भी जवानी की दहलीज पर खड़े किसी किशोर की। मगर अब 10 साल पुरानी एक नई तस्वीर सामने आई है, जो उसकी मौजूदगी की ताजा दस्तक है। बताया जा रहा है कि हिड़मा अब 50-55 वर्ष का हो चुका है, और यह तस्वीर उस समय की है जब वह अपने खूनी अभियान की पराकाष्ठा पर था। हिड़मा सिर्फ एक नाम नहीं, वह दहशत का चेहरा है, जिसके चारों ओर लोहे के सुरक्षा घेरे हैं। न मीडिया से सरोकार, न ही अपने ही कैडर से खुली मुलाकात। वह न कार्यक्रमों में दिखता है, न जनसभाओं में। हिड़मा की मौजूदगी किसी छाया की तरह होती है, बस खून के छींटों में झलकता है उसका चेहरा। बस्तर का आतंक, देश के दुश्मनों का पोस्टर ब्वॉय माड़वी हिड़मा उर्फ संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा सुकमा के पूवर्ती गांव का छउवा है, जो नक्सल का काल बन गया। 1990 में संगठन से जुड़ा, 13 साल की उम्र में टॉप लीडरशिप में शामिल हो गया। दसवीं तक पढ़ा, मगर खूनी रणनीति में ‘डॉक्टरेट’। कहते हैं, वह अपने साथ हमेशा एक छोटी नोटबुक रखता है, जिसमें ‘युद्ध के सूत्र’ दर्ज हैं। बस्तर के सात जिलों में उसकी सल्तनत है। और अब फोर्स उसके गढ़ में सांस ले रही है। गांव, जंगल, नदी, पहाड़, हर पगडंडी पर उसके जाल बिछे हैं। मगर देश की फोर्स अब इन जालों को काटने निकल चुकी है। नई तस्वीर, नया इशारा है, वक्त करीब है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2010 ताड़मेटला हमला में 76 CRPF जवानों की शहादत, 2013 झीरम घाटी नरसंहार में 31 जाने गईं, जिनमें कांग्रेस के बड़े नेता भी थे। 2017 बुरकापाल हमला में 25 जवान शहीद हो गये। माना जाता है कि हिड़मा ने फिलिस्तीन में हमास से गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग ली है। यह बात उसे बाकी माओवादियों से अलग बनाती है। पीएलजीए (People’s Liberation Guerrilla Army) यानी माओवादियों की सबसे शक्तिशाली फौज। पहले इसका नेतृत्व खुद हिड़मा करता था, अब वह CRC (Central Regional Committee) का लीडर है। अब बागडोर देवा के हाथों में है, मगर आदेश वही चलता है, जो जंगल की छाया से आता है।













