Kohramlive : चमचमाती रंगीन दुनिया की चकाचौंध के पीछे अक्सर एक धुंधली, मगर दर्द भरी तस्वीर छुपी होती है। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) की कहानी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। जो कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे थे, आज वही लाखों दिलों की धड़कन बन चुके हैं। मगर इस कामयाबी के पीछे छुपी है संघर्ष, आंसू और बेबसी की एक लंबी दास्तान।
बरसात की एक रात और ढहता हुआ घर (Khesari Lal Yadav)
बचपन किसी के लिये सुनहरी यादों से भरा होता है, मगर खेसारी लाल के लिये यह दौर तकलीफों की तपिश में बीता। जब वह इस दुनिया में आये, तभी कुदरत ने उनकी गरीबी पर अपनी मोहर लगा दी। उनके जन्म के साथ ही घर की मिट्टी की दीवारें बारिश में ढह गईं। वह अपने ही घर में जन्म नहीं ले सके, बल्कि पड़ोसी के घर इस दुनिया में कदम रखा।
जब पैर छूने पर मिला धक्का
खेसारी लाल के भीतर एक सपना पल रहा था—गायक बनने का, अभिनेता बनने का। मगर मंजिल आसान कहां थी, संघर्ष के दिनों में एक बार वह भोजपुरी इंडस्ट्री के एक बड़े कलाकार से मिले। आंखों में सम्मान लिये वह उनके चरण छूने झुके, मगर जवाब में पैरों से धक्का मिला और तिरस्कार भरे शब्द—”चल हट, न जाने कहां से आ जाते हैं ऐसे लोग।” उस पल खेसारी के दिल में एक आग जल उठी। उन्होंने कसम खा ली कि एक दिन यही इंडस्ट्री उनके नाम से जानी जायेगी।
गरीबी के दिन और रामायण-महाभारत की कमाई
वह दौर जब रोटी भी एक सपना लगती थी। तीन भाई-बहनों के बीच एक ही कपड़ा बारी-बारी से पहना जाता था। मगर संघर्ष से हार मानना खेसारी के खून में नहीं था। वह रामायण-महाभारत के आयोजनों में गाते और बदले में 50-100 रुपये मिलते। इसी पैसों से सपने को जिंदा रखा।
कैसेट बना, किस्मत बदली
जब उन्होंने अपना पहला भोजपुरी ऑडियो कैसेट रिकॉर्ड किया, तो वह छपरा, सिवान और गोपालगंज में खूब हिट हुआ। इसके बाद दूसरा कैसेट आया और उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों में जगह बना ली। फिर एक कैसेट म्यूजिक कंपनी के मालिक ने उनका साथ दिया और वही उनकी किस्मत का टर्निंग प्वाइंट बना। इसके बाद खेसारी लाल यादव ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वही खेसारी लाल, जिनका स्वागत कभी धक्के से हुआ था, अब इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं। उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि संघर्ष का कोई शॉर्टकट नहीं होता, मगर मेहनत और जिद की कोई हार नहीं होती।
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