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जेसीबी, जुगाड़ और झूठ, चौपारण की काली गाथा

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Chouparan(Krishna Paswan) : झारखंड के हरे-भरे खेतों से उठती मिट्टी की खुशबू आज कुछ अलग थी, शायद उसमें वो भरोसा नहीं था, जो मनरेगा जैसी योजना लाई थी। चौपारण प्रखंड का पाण्डेयबारा पंचायत और उसका एक शांत सा गांव पवई, जहां खामोशी चीख रही थी। दिन के उजाले में, जब गांव के मजदूर अपने बच्चों को लेकर राशन की लाइन में खड़े थे, तब उसी गांव की धरती में जेसीबी की गड़गड़ाहट गूंज रही थी, मिट्टी हट रही थी, मगर रोजगार नहीं उग रहा था। कुछ लोगों का कहना था कि सरकार की योजना थी डोभा निर्माण, मजदूरों के लिये। लेकिन यहां जेसीबी चल रही थी। ना मजदूर, ना मस्टररोल, ना निगरानी। और रोजगार सेवक रिजवान कहते हैं, “मैं तो छुट्टी पर हूं, मुझे नहीं पता।” लोगों का इल्जाम था कि अब गरीब की मजदूरी मशीन खा जाती है। लोगों का कहना था कि अगर पूरे मामले की गहराई से जांच हो तो चौंकाने वाली बातें सामने आ सकती है।

 

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