Ranchi (Arti Gupta) : दुनिया के मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के न्योता पर online पोएट्री अटैंड करने वाली झारखंड की आदिवासी महिला वंदना टेटे आदिवासियों की जिंदगी पर अपने खयालात बयां कर गई। उनका मानना है कि जल, जंगल और जमीन ही उनकी जिंदगी है। बालू का कण हो या बड़ा हाथी, इसे बचाने की खातिर आदिवासियों का होना जरूरी है। यही उनकी अनमोल धरोहर है। इनके पीछे ना जाने का मतलब है सृष्टि को खतरे में डालना। उनकी पोशाक और पहनावा एक खास पहचान है। अपनी काव्य पाठ्य से आदिवासी समाज को एक नई दिशा देने वाली वंदना टेटे का कहना है कि आदिवासी है तो जल, जंगल और जमीन है। इनकी रक्षा के लिए आदिवासियों की हिफाजत और भलाई जरूरी है।
जल, जंगल, जमीन और इसे लेकर आंदोलन पर दर्जनों किताबें लिख चुकीं रांची की रहने वाली वंदना रांची यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन डिपार्ट्मन्ट में आयोजित समारोह में आई थी। यह समहरोह विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित किए गए थे। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। इसमें यूजी और पीजी के स्टूडेंट बढ़-चढ़कर हिस्सा लिए। इस दौरान झूमर नाच, सादरी गाना सहित कई गतिविधियां हुई। मुख्य अतिथि के रूप में टीआरआई के डायरेक्टर रणेंद्र कुमार, टीआरएल डीन हरी उरांव, सामाजिक कार्यकर्ता जेवियर कुजूर, डॉक्युमेंट्री फिल्म मेकर दीपक बाड़ा और सामाजिक कार्यकर्ता आकाश रंजन शामिल हुए। विभाग की ओर से उपनिदेशक डॉ विष्णु चरण महतो, डॉ डीके सहाय, डॉ सुशील अंकन, संतोष उरांव, पूजा उरांव, समेत अन्य मौजूद थे। सुनें क्या बोली लेखिका वंदना टेटे…
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