Kohramlive : देश में बाल तस्करी की भयावह तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (JRC) नामक संस्था ने खुलासा किया है कि पिछले ढाई सालों में 1.10 लाख से ज्यादा बच्चों को तस्करी के जाल से छुड़ाया गया है। इन मासूमों को देश के अलग-अलग हिस्सों से, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, ढाबों, चाय की दुकानों और फुटपाथों से रेस्क्यू किया गया। सबसे ज्यादा बच्चों को तेलंगाना (30,267) से बचाया गया, वहीं बिहार (10,211), उत्तर प्रदेश (9,445), राजस्थान (8,278) और दिल्ली (6,564) में भी बड़ी संख्या में बच्चों को तस्करों से आजादी दिलाई गई। संस्था के मुताबिक, यह आंकड़ा अप्रैल 2023 से सितंबर 2025 के बीच चलाये गये अभियानों का नतीजा है। इस दौरान कई बच्चों को ऐसे हालात से निकाला गया, जहां उन्हें जबरन मजदूरी, यौन शोषण और बंधुआ काम के लिये मजबूर किया गया था। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की पहल पर राज्यों में “ऑपरेशन मुस्कान” और “ऑपरेशन स्माइल” जैसे विशेष अभियान चलाये जा रहे हैं। वहीं, ‘दर्पण’ फेस रिकॉग्निशन ऐप भी गुमशुदा बच्चों की पहचान में बड़ी मदद कर रहा है। JRC की नीति सलाहकार ज्योति माथुर ने कहा, बाल तस्करी के पीछे गरीबी, शिक्षा की कमी और सस्ते श्रम की मांग जैसे कारण हैं। सरकार और समाज अगर मिलकर कदम बढ़ायें तो हजारों बच्चों का भविष्य बदला जा सकता है।
गुजरे ढाई सालों में 1.10 बच्चों को तस्करी के जाल से छुड़ाया गया… जानें कैसे
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