Bihar : धूप तपी थी सरहद पर, और एक बेटा भारत मां की आंखों में अमर बन चुका था। नाम था, मोहम्मद इम्तियाज। पाकिस्तान की ओर से आई गोलियों की बौछार ने जब सीमा पर कोहराम मचाया, तब इम्तियाज ने अपने खून की अंतिम बूंद तक मुकाबला किया। वे सब इंस्पेक्टर थे, पर काम उनका किसी योद्धा से कम न था और अब जब उनके बूट खामोश हैं और वर्दी तिरंगे में लिपटी घर लौटी है, तो सवाल उठ खड़ा हुआ है, क्या देश इस वीर सपूत को उसका हक देगा?
क्या मिलेगा उसे परमवीर चक्र? लोक सेवा समिति की आवाज आज उसी सवाल को लेकर उठी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद नौशाद ने कहा, “ये कोई साधारण बलिदान नहीं था, ये प्रेरणा है हर उस बच्चे के लिये जो आज देश की रक्षा का सपना देखता है। हम मांग करते हैं कि शहीद इम्तियाज को मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा जाये।”
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सम्मान की वो चादर जिसमें उनके दर्द को ढांपा जा सके, यह भी समिति की दूसरी बड़ी मांग है। समिति की सदस्य संगीता सिन्हा, अनिता लिंडा, रमण कुमार सिंह और प्रो. हरबिंदर बीर सिंह ने एक स्वर में कहा, ”देश की मिट्टी इम्तियाज़ जैसे शहीदों के रक्त से पवित्र होती है। यह देश उनका ऋणी है।”














