UP : बरेली के सम्राट अशोक नगर का रहने वाला 25 साल का संकित, पराग डेयरी के पार्लर से रोज सैकड़ों लोगों को दूध, दही, छाछ देता था। शहर उसे ‘दूधवाला’ कहकर पहचानता था, पर दोस्तों के बीच वह था ‘बिंदास संकित’। हर जश्न में सबसे पहले पहुंचने वाला, हर ठहाके में सबसे ऊंचा हंसने वाला। लेकिन उसे क्या पता था, कि जिन दोस्तों के साथ वो जाम टकराता है, उन्हीं के मन में उसकी मौत का प्लान बन रहा है। बीते 21 मई की शाम, संकित की दुकान पर बैठकी जम चुकी थी। अंशू पहले से वहीं था, तभी पहुंचे अमन, आशीष और जावेद। शराब का दौर चला, गुटखा और गालियों के साथ बहस छिड़ी, “देखो सबसे बड़ा कौन है?” संकित बोला, “मैं जब बोलता हूं, सामने वाला कांपता है।” अमन गरजा, “गुंडा तू होगा अपने मोहल्ले में, लेकिन मैं इलाके का बाप हूं।” ईगो की आग सुलग चुकी थी। फैसला वहीं हो गया, “इस बार इसे दिखाना पड़ेगा कि असली गुंडा कौन है।” चारों दोस्तों ने मिलकर संकित को बहाने से बुलाया – “चलो यार बाहर चलते हैं, थोड़ा घूम लेते हैं, एक पैग और मार लेते हैं।” संकित कुछ समझ पाता, इससे पहले अमन अपने घर से हथियार उठा लाया। बरेली के मोहनपुर के सुनसान रास्ते पर, जहां दूर-दूर तक कोई साया नहीं था, वहीं पर दोस्तों ने उसे घेर लिया। अंशू, आशीष और जावेद ने पकड़ रखा था, और अमन ने पिस्टल सीधा उसकी छाती पर रख दिया, “अब बता, कौन बड़ा गुंडा है?” संकित की हत्या के बाद बरेली थर्रा गया था। सिटी SP मानुष पारीक की अगुवाई में पुलिस ने ऑपरेशन शुरू किया। मुखबिर की सूचना पर कठपुला पुल के पास पुलिस ने चारों को घेरा। जवाबी फायरिंग हुई।
अमन और जावेद के पैरों में गोली लगी। चारों को दबोच लिया गया। थाने में जब पूछताछ हुई तो आरोपियों ने कहा,
“हमें गुस्सा इस बात का था कि संकित खुद को सबसे बड़ा समझता था। हमें नीचा दिखाया, इसलिए उसे मारना जरूरी था।”









