Dhanbad : इतिहास के पन्नों में दर्ज धनबाद का गोल्फ ग्राउंड एक बार फिर संघर्ष, संकल्प और स्मृतियों का साक्षी बना। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 54वें स्थापना दिवस समारोह में CM हेमंत सोरेन ने शहीदों को नमन किया और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच पर मंत्री सुदिव्य सोनू, हफीजुल हसन समेत कई दिग्गज मौजूद रहे। मंत्रियों ने एक स्वर में गुरुजी को भारत रत्न देने की मांग उठाई। यह पहला मौका था जब गुरुजी मंच पर नहीं, बल्कि तस्वीर में मौजूद थे। मुख्यमंत्री और नेताओं ने गुरुजी के आंदोलनों, उनके संघर्ष और झारखंडी अस्मिता की कहानी दोहराई। दूर-दराज के आदिवासी बहुल इलाकों से उमड़ा जनसैलाब, पंडाल के भीतर ही नहीं, बाहर तक इस बात का गवाह बना कि गुरुजी आज भी जन-मन में जीवित हैं।
‘जोहार’ का बढ़ता मान
CM हेमंत सोरेन ने मंच से सभी को “जोहार” कहकर अभिवादन किया। कहा, आज यह शब्द हर जगह सम्मान पा रहा है। लंदन दौरे का जिक्र करते हुये बताया कि वहां भी झारखंडी भाइयों ने उन्हें “जोहार” कहकर स्वागत किया। नगर निकाय चुनाव की आचार संहिता के कारण समारोह दिन में हुआ। CM बोले, माइक की पाबंदी हो या धूप-गर्मी, लक्ष्य के रास्ते में कुछ भी आड़े नहीं आता, मजदूरों के साथ खड़ा रहना ही उनकी राजनीति है। CM हेमंत सोरेन ने कहा, यही वह मैदान है जहां से अलग राज्य, जल-जंगल-जमीन की ऐतिहासिक घोषणायें हुईं। गुरुजी सिर्फ झामुमो के नहीं, पूरे झारखंड की पहचान थे। उनकी कमी राज्य के लिये अपूरणीय है, आज का दिन उन्हें नमन करने के साथ विकास की दिशा तय करने का भी है। CM हेमंत सोरेन ने भाजपा पर हमला बोलते हुये कहा कि राज्य बनने के बाद जल-जंगल-जमीन के दुश्मनों ने 15 साल तक शासन किया, स्कूल बंद हुये, रोजगार छिना, पलायन बढ़ा। गुरुजी ने फिर आंदोलन छेड़ा और सत्ता बदली। अगर शुरुआत से हमारी सरकार होती, तो विकास और तेज होता। CM ने अबुआ सरकार के काम गिनाये और कहा कि मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय में प्राइवेट स्कूल जैसी पढ़ाई होती है। शिक्षकों की भर्ती की गई। कल्याण विभाग के हॉस्टलों में भोजन व्यवस्था है, भूख से एक भी मौत हमारी सरकार में नहीं हुई। बच्चों को विदेश पढ़ाई के मौके मिले। हर शाम अधिकारियों की फील्ड मौजूदगी रहती है। कोरोना काल में 25–30 लाख मजदूरों की वापसी का जिक्र करते हुये कहा कि विपक्ष ने सड़कों पर छोड़ा, हमने घर लौटाया। असम के चाय बागानों में आदिवासियों की दशा पर चिंता जताई, वहीं, एकता और सामूहिक शक्ति का आह्वान किया।
धनबाद का कोयला, झारखंडी हक
CM हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा कि कोयला खनन की आउटसोर्सिंग कंपनियों को 75% स्थानीय रोजगार देना होगा। नहीं दिया, तो कंट्रोल किया जायेगा। हक के लिये मिलकर लड़ना होगा। सेना-बलों की नियमित भर्तियों के ठप होने पर चिंता जताई। उन्होंने् कहा कि ग्रामीण युवाओं को मजबूरी में अग्निपथ में जाना पड़ रहा है। शहीद अग्निवीरों के आश्रितों को रोजगार दिया जायेगा। अंत में संकल्प लिया गया कि “गुरुजी हमारे बीच नहीं हैं, पर उनका रास्ता है। सत्ता मुश्किल से मिली है, अब झारखंड को सबसे बेहतर बनाने का समय है।”








