Garhwa(Nityanand Dubey) : कभी तकरार, कभी तन्हाई और फिर अदालत की दहलीज। लेकिन इस बार फैसला कागजों ने नहीं, संवाद ने किया और नतीजा यह हुआ कि टूटने की कगार पर खड़ा एक परिवार फिर से एक हो गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा संचालित ‘मध्यस्थता अभियान 2.0’ रिश्तों के लिये उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। इसी अभियान के तहत वर्षों से आपसी विवाद में उलझे सुनीता कुमारी और राकेश रजवार ने सुलह-समझौते के साथ नये सिरे से साथ जीने का फैसला किया।
जानकारी के अनुसार, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से मनमुटाव चल रहा था। बात इतनी बढ़ी कि मामला अदालत तक पहुंच गया। पत्नी ने खर्चा भत्ता का वाद परिवार न्यायालय में दायर किया था, वहीं दहेज उत्पीड़न का एक मामला भी दर्ज था। इस खींचतान में रिश्ते दरक रहे थे, वहीं, बच्चों का भविष्य भी अधर में लटक गया था। ‘मध्यस्थता अभियान 2.0’ के तहत प्रशिक्षित मध्यस्थों ने दोनों पक्षों की काउंसलिंग शुरू की। मध्यस्थता कर रहे अनुज कुमार मिश्रा ने दोनों को परिवार के महत्व, बच्चों के भविष्य और लंबी कानूनी लड़ाई के दुष्परिणामों को सहज भाषा में समझाया। कई दौर की बातचीत के बाद पुराने गिले-शिकवे पिघले, दिल की गांठें खुलीं और दोनों साथ रहने को राजी हो गये। आज DLSA कार्यालय में माहौल बदला-बदला था, मिठाइयां बंटी, मुस्कानें लौटीं और पति-पत्नी ने मिलकर भविष्य संवारने का संकल्प लिया।








