Ranchi : राजधानी रांची की सियासी फिजा में हलचलें आती-जाती रहती है। जनआक्रोश की लहरें कभी CM हाउस की ओर बह निकलतीं, तो कभी राजभवन के मुख्य द्वार पर आकर ठिठक जातीं। आवाज़ें बुलंद होतीं, नारों की गूंज आसमान छूती और फिर सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच जाता। मगर अब… प्रशासन की कलम ने सड़कों पर उतरती इन आवाजों को एक सख्त दायरे में बांध दिया है। रांची के SDO उत्कर्ष कुमार ने BNSS की धारा-163 के तहत अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग करते हुये खास सरकारी इमारतों और संवेदनशील इलाकों के इर्द-गिर्द निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
अब ये जगहें आम प्रदर्शनकारियों के लिए ‘निषिद्ध क्षेत्र’ होंगी:
- मुख्यमंत्री आवास, कांके रोड— 100 मीटर की परिधि।
- राजभवन— 100 मीटर की परिधि (जाकिर हुसैन पार्क को छोड़कर)।
- झारखंड उच्च न्यायालय— 100 मीटर की परिधि।
- नई विधानसभा— 500 मीटर की परिधि।
- प्रोजेक्ट भवन, नेपाल हाउस— 100 मीटर की परिधि।
- एच.ई.सी. धुर्वा, प्रोजेक्ट भवन— 200 मीटर की परिधि।
क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?
- बिना अनुमति के धरना, प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली या आमसभा।
- हथियार या अस्त्र-शस्त्र लेकर निकलना।
- लाठी, डंडा, तीर-धनुष या अन्य हथियारों के साथ चलना।
- बिना अनुमति के ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल।
सरकारी अधिकारी एवं न्यायालय संबंधी कार्य इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन आमजन और राजनीतिक दलों के लिए यह सख्ती किसी वज्रपात से कम नहीं। राजनीति की धधकती आग पर प्रशासन ने कानून का एक ठंडा छींटा डाल दिया है। अब देखना यह होगा कि ये सख्ती कब तक कायम रहती है और जनता की आवाज़ किस नये रास्ते से सत्ता के कानों तक पहुंचती है।
यह निषेधाज्ञा दिनांक 02.05.2025 या अगले आदेश तक (जो पूर्व लागू हो) तक रहेगी।






