Chouparan(Krishna Paswan) : झारखंड के हजारीबाग के एक छोटे से गांव चौपारण चैथी की मिट्टी से निकला एक साधारण से लड़के ने 2001 में ठान लिया कि पाककला ही उनका धर्म और कर्म बनेगा। कहते हैं न ठान लो तो जीत, मान लो तो हार! मुंबई की गलियों में खुद को साबित करना आसान न था। पर गांव का यह लड़का हार मानने वालों में नहीं था। होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के साथ-साथ संघर्ष और मेहनत की तपस्या ने उसे धीरे-धीरे पाककला का “जादूगर” बना दिया। नोवोटेल जुहू बीच, हयात रीजेंसी अंधेरी, विवांता बाय ताज चर्चगेट, जैसे बड़े-बड़े फाइव स्टार होटलों की रसोई में जब विक्की साव ने कड़ाही चलाई तो सिर्फ खुशबू ही नहीं, बल्कि उनके नाम का जादू भी फैल गया। उनकी खासियत – कॉन्टिनेंटल और इटैलियन डिश, पर असली पहचान बनी उनके “यूनिक स्टाइल” से। खुद विक्की साव कहते हैं , “खाना बनाना मेरे लिये नौकरी नहीं, कला है और हर डिश मेरे दिल की धड़कन।” आज वह सिर्फ एक शेफ नहीं, बल्कि India’s Master Chef के नाम से मशहूर हो चुका है।
सम्मान की सीढ़ियां
संघर्ष और जुनून का यह सफर सिर्फ प्लेटों तक सीमित नहीं रहा। विक्की साव को मिले, Mumbai Achievers Award 2023। Magic Book of Record – Best Chef Award 2024। ये अवार्ड्स उनके लिये सम्मान नहीं, बल्कि सपनों की जीत की गवाही हैं। आज शेफ विक्की साव के नाम से न सिर्फ मुंबई, बल्कि कई राज्यों में होटल और ग्राहक जुड़े हैं। वे कहते हैं, “ग्राहक की मुस्कान ही मेरा सबसे बड़ा अवार्ड है।” गांव की संकरी पगडंडियों से लेकर फाइव स्टार होटलों की रसोई तक, विक्की साव ने साबित कर दिया कि अगर दिल में जुनून हो तो दूरी, हालात और मुश्किलें सब कदमों में झुक जाती हैं। विक्की साव की कहानी हर उस युवा के लिये सबक है जो अपने गांव से बड़े सपने देखने की हिम्मत करता है। उन्होंने दिखा दिया कि झारखंड की मिट्टी से निकला हुनर भी दुनिया में परचम लहरा सकता है।














