रामगढ़ से दबोचा गया फर्जी सिम गैंग का खिलाड़ी, 44 लाख ठगे…

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Ramgarh : मोबाइल की एक घंटी, फर्जी सिम का एक खेल और देखते ही देखते बैंक खाते से लाखों रुपये गायब। रामगढ़ में साइबर अपराधियों के इसी खतरनाक नेटवर्क पर पुलिस ने बड़ी चोट की है। साइबर अपराध थाना पुलिस ने एक ऐसे साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया है, जिस पर फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल उपकरणों के जरिये बैंक खातों का दुरुपयोग कर साइबर ठगी को अंजाम देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी निखिल कुमार को उसके घर से गिरफ्तार किया है।

पहले पकड़ा गया विकास, फिर खुला निखिल का नाम

इस पूरे मामले की कड़ी मार्च 2026 में गिरफ्तार किये गये आरोपी विकास कुमार उर्फ विकास यादव से जुड़ी हुई है। पुलिस ने विकास को 17 मार्च को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पूछताछ के दौरान विकास ने कई अहम राज उगले, जिनमें निखिल कुमार का नाम भी सामने आया। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की रणनीति तैयार की। रामगढ़ पुलिस कप्तान के निर्देश पर DSP (मुख्यालय) सह साइबर थाना प्रभारी अकरम रजा के नेतृत्व में स्पेशल टीम बनाई गई। 29 मई को रामगढ़ के सूर्यनगर रोड नंबर-4 स्थित आवास पर छापेमारी की गई, जहां से निखिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चार मोबाइल फोन और चार फर्जी सिम कार्ड बरामद किये।

फर्जी सिम से चलता था खेल

तकनीकी जांच में सामने आया कि बरामद सभी सिम कार्ड फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिये गये थे। जांच में यह भी पता चला कि दो मोबाइल इंटरनेट कॉलिंग के लिये इस्तेमाल किये जा रहे थे। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों का उपयोग साइबर अपराधियों के नेटवर्क से संपर्क साधने और ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।

महिला के खाते से 44 लाख की संदिग्ध ट्रांजैक्शन

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पुलिस को पता चला कि बरामद मोबाइल फोन में से एक का उपयोग एक महिला के बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर को सक्रिय करने में किया गया था। इसके बाद उसी खाते के माध्यम से करीब 44 लाख रुपये की बैंकिंग, UPI और नेट बैंकिंग ट्रांजैक्शन की गई। पुलिस इन लेन-देन को साइबर अपराध से अर्जित राशि मानकर जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था। वह साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क का हिस्सा था और फर्जी सिम तथा मोबाइल उपकरणों के जरिये बैंक खातों का संचालन कराने में अहम भूमिका निभा रहा था। जब्त मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिये भेजा गया है। DSP अकरम रजा ने मीडिया को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस अन्य संभावित आरोपियों और पूरे साइबर नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है। उन्होंने कहा कि निखिल कुमार से पूछताछ में कई और महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की संभावना है, जिससे साइबर ठगी के इस नेटवर्क के अन्य सदस्य भी कानून के शिकंजे में आ सकते हैं।

CYBER CRIMINAL ARRESTED

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