Ranchi : सूरज ने जैसे ही पूरब से झांका, रांची के अलग-अलग अंचलों में हलचल तेज हो गई। कोई दस्तावेज संभाल रहा था, तो कोई लंबी कतार में अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था। यह कोई आम दिन नहीं था—यह वो दिन था जब वर्षों से उलझी जमीनों की तकदीर का फैसला होना था। दाखिल-खारिज राजस्व शिविर में उम्मीदों की कतार लगी थी, कहीं खुशी, तो कहीं मायूसी का आलम था। आज के इस विशेष शिविर में कुल 3467 मामलों की सुनवाई हुई, जिसमें 829 मामलों को स्वीकृति मिली यानी जमीन के असली मालिकों को उनका हक मिल गया। लेकिन 466 मामले खारिज भी कर दिये गये, जिससे कई लोगों की उम्मीदें अधर में लटक गईं।
जिन्हें मिली मंज़ूरी, उनकी आंखों में चमक
अरगोड़ा, अनगड़ा, कांके, बुंडू, ओरमांझी, मांडर, रातू जैसे अंचलों में आज फैसलों की बारिश हुई। अरगोड़ा में 10 में से 07, अनगड़ा में 292 में से 62, कांके में 486 में से 57 और नामकुम में 514 में से 192 मामलों को हरी झंडी दी गई। जब नामकुम के रामचरण बाबू ने अपनी जमीन के कागज पर अफसर की मोहर देखी, तो उनकी आंखों में आंसू छलक आये। उन्होंने वर्षों से इस फैसले का इंतज़ार किया था। सिल्ली में 14 में से 0, यानी कोई भी मामला पास नहीं हुआ, वहीं खलारी में भी हाल कुछ ऐसा ही रहा। लोगों की मायूसी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी, मगर वे ये कहकर लौटे “अभी नहीं तो अगले शिविर में सही!”
रांची के DC मंजूनाथ भजंत्री की कोशिश रही कि 10 डिसमिल से कम की जमीन के मामले बिना किसी आपत्ति के 30 दिनों में और आपत्ति होने पर 90 दिनों में निपटाये जाये। इस व्यवस्था से उन लोगों को बहुत राहत मिली, जो सालों से अपने हक के लिये सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे।






