Ranchi : झारखंड की धरती सोमवार को उस समय गर्व से भर उठी, जब महान अभियंता भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 164वीं जयंती पर 58वां अभियंता दिवस समारोह बड़े ही गरिमामय अंदाज में मनाया गया। सभागार में बैठे हर चेहरे पर वही चमक थी, जो आधुनिक भारत और सशक्त झारखंड के सपनों की नींव गढ़ने वालों के माथे पर सदा दिखती है।
“आधुनिक झारखंड का निर्माण इंजीनियरों के बिना संभव नहीं”
समारोह की मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भावनाओं से भरे शब्दों में कहा, जब भी आधुनिक भारत की कल्पना होती है, उसमें इंजीनियरों की भूमिका अग्रिम पंक्ति में खड़ी नजर आती है। आप सभी की मेहनत और लगन से ही झारखंड का हर कोना विकास की रोशनी से दमक रहा है। हमें विश्वास है कि आप ऐसे ढांचे गढ़ेंगे, जो आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से खड़े रहेंगे। दीपिका पांडेय सिंह ने स्मरण कराया कि 15 सितंबर को पूरे देश में इंजीनियरिंग के महापुरुष मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर अभियंता दिवस मनाया जाता है। वे भारतीय इंजीनियरिंग के जनक कहे जाते हैं। उनकी मेहनत, नवाचार और त्याग से आज भी हमें प्रेरणा मिलती है। झारखंड के युवा इंजीनियर यदि उनके आदर्शों पर चलें, तो यह राज्य आत्मनिर्भरता और आधुनिकता का नया इतिहास रचेगा।”
समारोह में मौजूद शहरी विकास एवं आवास मंत्री सुदिव्य कुमार और पेयजल एवं स्वच्छता, उत्पाद एवं मद्यनिषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने अभियंताओं के योगदान को राज्य की आत्मा बताया। दोनों मंत्रियों ने कहा कि अभियंता सिर्फ सीमेंट और लोहे से पुल या इमारत नहीं गढ़ते, बल्कि उम्मीदों और सपनों को आकार देते हैं। जल आपूर्ति, स्वच्छता, आवास और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में उनकी भूमिका राज्य की नींव है। इस अवसर पर अभियंताओं की समाज-निर्माण, तकनीकी नवाचार और सतत विकास में अहम भूमिका को रेखांकित किया गया। सभागार में गूंजते हर शब्द ने इस सच्चाई को दोहराया कि “इंजीनियर ही हैं, जो पत्थरों को इमारत और सपनों को साकार रूप देते हैं।”








