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कीर्ति के ह*त्यारे का ए*नकाउंटर, सुकून मिला पिता को…

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UP : बीटेक कंप्यूटर साइंस की होनहार छात्रा कीर्ति की जान लेने वाला बेखौफ गुंडा जितेंद्र उर्फ जीतू को यूपी पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। कीर्ति के दम तोड़ते ही गैंगस्टर जीतू को 9 घंटे के अंदर खोज निकाला गया और उसे मुठभेड़ में मार गिराया गया। कीर्ति के मारे जाने से उसका परिवार टूट गया। सबसे बुरा हाल उसके पिता रविंद्र सिंह का है। वह अंदर से टूट गये हैं। कीर्ति सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर अपने और परिवार के सपनों को साकार करना चाहती थी। पिता ने उसके अंदर के हुनर को जाना, कीर्ति का चयन JEE एडवांस की परीक्षा में लखनऊ के सरकारी कॉलेज में हो गया था, लेकिन बेटी कीर्ति पास रहे, यह सोचकर पिता ने उसका दाखिला गाजियाबाद के ABES कॉलेज में बीटेक कंप्यूटर साइंस स्ट्रीम में करवाया। वहीं बेटी की फिक्र पिता को हमेशा सताते रहती थी। दिन भर में 10 बार फोन पर बिटिया का हाल चाल पूछते रहते थे। कॉलेज से जब तक घर नहीं पहुंच जाती थी, उन्हें सुकून नहीं मिलता था। रविंद्र सिंह के दर्द को वहीं समझ सकता कि जिस बूढ़े कंधे पर किसी जवान बेटी की अर्थी निकली हो। तमन्ना बिटिया की डोली उठाने की थी। सारे अरमान और खुशियां दफन हो गई। बेटी के हत्यारे के मारे जाने पर पिता के मुख से हौले से सिर्फ इतना ही निकला हत्यारे के साथ सही सुलूक होना चाहिये। दूसरे गुनाहगार को भी यहीं सजा मिलनी चाहिये। ताकि अपराधियों में डर-भय रहे। रविंद्र सिंह हरियाणा के जींद में रेलवे में लोको पॉयलट हैं।

इधर, कीर्ति की बेरहमी से हत्या करने के बाद जीतू पर 25 हजार रुपये का इनाम रखा गया था। उसपर पहले से करीब 13 केस दर्ज थे। एनकाउंटर में मारे गये जीतू ने नशे के लिए अपराध जगत से नाता जोड़ा। पहले वह वेल्डिंग का काम करता था, इसमें मन नहीं लगा तो रंगाई-पुताई का काम किया, इसमें भी मन उचट गया तो काम छोड़ दिया। घरवालों के कहने पर टेम्पो चलाना शुरू किया, यह काम भी उसे रास नहीं आया और साल 2016 में अपराध जगत से नाता जोड़ा और दलदल में धंसता चला गया। नतीजा 29 साल की जवानी में बेमौत पुलिस के हाथ मारा गया।

पुलिस ने मीडिया को बताया कि रविवार की रात 10 बजे मुरादनगर में सीकरी कलां में रहनेवाले यतेंद्र वशिष्ट से बुलेट और 51 सौ रुपये लूट की सूचना पर पुलिस चेकिंग कर रही थी। नहर पटरी पर बुलेट बाइक पर दो बदमाश नजर आये। खुद को पुलिस से घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया। एनकाउंटर में जीतू मारा गया। उसके सीने में दो और पैर में एक गोली लगी। लहुलूहान जीतू को जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे मृत बता दिया गया। बदमाशों की गोली लगने से दरोगा भानू प्रकाश घायल हुये हैं।

गौरतलब है कि बीते 27 अक्टूबर की शाम कीर्ति अपने कॉलेज की सहेली दीक्षा के साथ एक टेम्पो से घर लौट रही थी। वह अपने घर हापुड़ के पन्नापुरी जा रही थी। रास्ते में हाईवे पर मसूरी के पास जितेंद्र अपने दोस्त बलवीर के साथ बाइक पर टेम्पो का पीछा करते हुये आया। बाइक को टेम्पो के बगल में सटा कीर्ति के हाथ से मोबाइल लूटने लगा। कीर्ति ने मोबाइल नहीं छोड़ा तो उसे बाहर खींच कर रोड पर गिरा दिया गया। वह बहुत दूर तक घिसटती चली गई। उसके सिर की हड्डी टूट गई थी। बीते रविवार की शाम साढ़े सात बजे उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। बलवीर को पुलिस ने शनिवार को ही जेल भेज दिया था। कीर्ति की मौत के नौ घंटे बाद मुख्य आरोपी जितेंद्र मुठभेड़ में मारा गया।

 

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