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”विरासत और संस्कृति को आवाम के बीच लाने की कोशिश जरूरी”

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Hazaribagh(Sunil Sahu) : हजारीबाग की विरासत और संस्कृति के अनछुये पहलुओं को आवाम के बीच लाने की कोशिश होती रहनी चाहिये, ताकि लोग यहां की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी जानकारी एक दूसरे से शेयर कर सकें। इस नेक काम में प्रशासन का सहयोग मिलता रहेगा। यह कहना है हजारीबाग की DC नैंसी सहाय का। मौका था मौलाना अबुल कलाम आजाद इनडोर स्टेडियम में आयोजित ”हजारीबाग की विरासत” की थीम पर आधारित सेमिनार का। मौके पर मौजूद जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक आनंद ने कहा कि हजारीबाग में मानव सभ्यता के प्रारंभ से लेकर आधुनिक काल तक के मानक संदर्भ इस प्रकार से सुलभ है, जिससे सभ्यता के विकास की व्याख्या हो सकती है। इस्को गुफा चित्र के अंकन की बारीकियां स्थानीय कोहबर एवं सोहराय चित्रकला में उपस्थित है, जो सभ्यता के विकास की निरंतरता को दर्शाती है।

पद्मश्री बुलू इमाम ने हजारीबाग के विभिन्न पुरातात्विक स्थलों जैसे दैहर, बहोरनपुर, इचाक, इटखोरी से मिले पुरातात्विक अवशेषों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुये कहा कि हजारीबाग का इलाका बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के चरण भी यहां पड़े हैं। जैन धर्म की भी ऐतिहासिकता इस क्षेत्र में उपलब्ध रही है। उन्होंने इन धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया। मेगालिथ पर अपने किये गये विभिन्न शोधों का हवाला देते हुये शुभाषीश दास ने कहा कि पूरी दुनिया में मेगालिथों को लेकर लोग अत्यंत संवेदनशील है। कई देशों में वहां के मेगालिथ साइटों को विशेष धरोहर की सूची में शामिल किया जा चुका है।

स्थानीय संत कोलंबस कॉलेज के प्राध्यापक डॉ शत्रुघ्न कुमार पांडेय ने स्वतंत्रता आंदोलन में हजारीबाग के योगदान को रेखांकित करते हुये कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी हजारीबाग जेल में नजरबंद किये जाने की योजना थी। उन्होंने संबंधित अभिलेखों का संदर्भ देते हुये कहा कि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को यह भय था कि नेता जी को हजारीबाग जेल में नजरबंद किये जाने के बाद भयानक रूप से विद्रोह हो सकता है और हजारीबाग जेल में उस समय बंद क्रांतिकारियों को लोग छुड़ा लेंगे। जिसके कारण यह योजना टल गई। उन्होंने हजारीबाग जेल में बंद किये गये देश के विभिन्न प्रांतो के क्रांतिकारी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक विवरण में हजारीबाग को ‘निर्वासित भूमि’ एवं जंगल-कला पानी की संज्ञा दी गई है। जहां वर्मा, थाईलैंड, सिंगापुर, पंजाब, राजस्थान, मणिपुर, मेघालय सहित कई राज्यों के कैदियों को बंदी बनाकर रखा गया है।

जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा आयोजित इस सेमिनार में हजारीबाग के कई पत्रकार एवं बुद्धिजीवी मौजूद थे। धन्यवाद ज्ञापन करते हुये जिला जनसंपर्क अधिकारी रोहित कुमार ने कहा कि आज के इस सेमिनार में प्रस्तुत वक्ताओं के अभिभाषण को पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया जायेगा।

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