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आनंद मोहन की रिहाई पर छलक आये DM की बेवा और बेटी के आंसू… देखें क्यों

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KohramLive : दिवंगत IAS जी कृष्णैया की बेवा जी उमा कृष्णैया और बेटी पद्मा कृष्णैया आज बहुत दुखी हैं। उनके आंखों में आंसू है। कारण, जी कृष्णैया की हत्या मामले में दोषी करार दिये गये आनंद मोहन की रिहाई।

पूर्व सांसद और विधायक आनंद मोहन को रिहा कर दिया गया। वे अब जेल से बाहर हैं। गुजरे कुछ दिनों पहले बिहार सरकार ने जेल मैनुअल में संशोधन कर 27 लोगों को रिहा करने का आदेश दिया था। इसमें बाहुबली आनंद मोहन का भी नाम था। बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई ‘जेल सजा क्षमादान आदेश’ के तहत की गई। अक्टूबर 2007 में कोर्ट ने आनंद मोहन को सजा-ए-मौत सुनाई थी, लेकिन दिसंबर 2008 में पटना हाई कोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

यहां याद दिला दें कि साल 1994 की 4 दिसंबर को उत्तरी बिहार का कुख्यात गैंगस्टर छोटन शुक्ला का मर्डर कर दिया गया था। मर्डर के बाद मुजफ्फरपुर के इलाकों में भयंकर तनाव फैल गया था। लोगों का गुस्सा उबाल पर था। वारदात के अगले दिन यानी 5 दिसंबर 1994 को हजारों लोग सड़क पर उतर आये थे। गैंगस्टर छोटन शुक्ला की डेड बॉडी को सड़क पर रख प्रदर्शन कर रहे थे। उसी वक्त गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया एक विशेष बैठक में शामिल होने के बाद अपने गोपालगंज लौट रहे थे। वे अपनी सरकारी एम्बेसडर में थे। उनकी कार में लाल बत्ती लगी हुई थी। उन्हें इस बात का इल्म नहीं था कि हाइवे पर बवाल हो रहा है।

जैसे ही उनकी गाड़ी प्रदर्शन कर रही भीड़ के पास पहुंची, लोगों सरकारी गाड़ी देख भड़क उठे। उनका गुस्सा उबाल पर आ गया। भीड़ ने डीएम पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया।

डीएम जी. कृष्णैया भीड़ को यह बताने की काफी कोशिश की कि वे गोपालगंज के डीएम हैं, मुजफ्फरपुर के नहीं। लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। भीड़ ने उन्हें खींच कर कार से बाहर निकाला और पीट-पीट कर उसनी जान ले ली। इल्जाम था कि डीएम की हत्या करने वाली उस भीड़ को कुख्यात बाहुबली आनंद मोहन ने उकसाया था।

मूल रूप से तेलंगाना के महबूबनगर के रहने वाले जी. कृष्णैया बिहार कैडर में 1985 बैच के IAS अधिकारी थे। वह दलित समुदाय से आते थे और बेहद साफ सुथरी छवि वाले ईमानदार अफसर थे। वह साल 1994 में ही गोपालगंज के डीएम बने थे। कृष्णैया का जीवन बहुत संघर्षों भरा था। उन्होंने एक कूली के तौर पर काम करना शुरू किया था। इसके बाद पढ़ाई-लिखाई और कड़ी मेहनत कर वह IAS बने थे।

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