Giridih : बारिश से भीगी शाम… गिरिडीह के गांधी चौक के पास बहता नाला… और उसी में समा गया दो साल का मासूम। शहर की रौनक उस क्षण जैसे थम गई, जब खेलते-खेलते ज़िंदगी से खेल कर बैठा यह नन्हा फरिश्ता तेज बहाव में बह गया। रात भर चलता रहा इंतज़ार… मां की सिसकियां, पिता की आंखों में उम्मीद की आख़िरी किरणें… लेकिन 18 घंटे की बेचैन खोज के बाद जब बचाव दल ने बाभनटोली के पास नाली से मासूम अंकुश का शव निकाला, तो पूरा इलाका मातम में डूब गया। बच्चे की मां-बाप की चीत्कार सुन कर हर दिल कांप उठा। मानो पूरा शहर उसकी पीड़ा में शामिल हो गया हो।
गुस्से से उबल उठा शहर
घटना के बाद गांधी चौक पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने जिला प्रशासन और नगर निगम को जमकर कोसा “अगर यह किसी बड़े आदमी का बच्चा होता तो क्या इतनी देर लगती?”
अफसरों की अपील
SDM श्रीकांत विस्पुते, DSP नीरज कुमार सिंह समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए SDM खुद जमीन पर बैठकर बात करने लगे। लेकिन भीड़ का दिल कहां मानने वाला था, उनकी आंखों में सिर्फ मासूम की लाश का मंजर था।
हादसे की पूरी दास्तान
मासूम अंकुश गिरिडीह के मुफस्सिल क्षेत्र के दीपक ठाकुर का बेटा था। शनिवार की शाम अंकुश मां के साथ बाजार आया था। बारिश भी हो रही थी। दुकान से सामान लेते वक्त मां के हाथों से अंकुश का हाथ फिसल गया और वो अचानक नाले के तेज बहाव में समा गया। रात डेढ़ बजे तक खोज चलती रही, लेकिन नन्ही जान का कोई सुराग नहीं मिला। सुबह फिर से अभियान शुरू हुआ और कई घंटे की जद्दोजहद के बाद बच्चे का शव मिला।








