Kohramlive : 15 अगस्त, देश जब आजादी का जश्न मना रहा था, उसी दिन भारतीय क्रिकेट के एक युवा सितारे ने बल्ले से इतिहास की ऐसी इबारत लिख दी, जिसे लंबे समय तक याद किया जायेगा। श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट के पहले दिन देवदत्त पडीक्कल ने नंबर-3 पर उतरकर शानदार शतक जड़ा। उनका यह शतक भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में दर्ज होने वाला एक खास मुकाम बन गया।
15 अगस्त पर शतक लगाने वाले पहले भारतीय
देवदत्त पडीक्कल 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर टेस्ट शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गये। यही नहीं, वह 21वीं सदी में टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले दूसरे बायें हाथ के भारतीय बल्लेबाज भी बने। देवदत्त ने 134 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक था और श्रीलंका की धरती पर भी उनका पहला टेस्ट शतक रहा। पहले दिन का खेल खत्म होने तक देवदत्त ने 178 गेंदों पर नाबाद 131 रन बना लिये थे। उनकी पारी में एक छक्का और 12 चौके शामिल रहे। उनकी इस शानदार बल्लेबाजी के दम पर भारत ने दिन का खेल खत्म होने तक 2 विकेट पर 288 रन बना लिये।
गांगुली से पुजारा तक, अब देवदत्त का नाम
नंबर-3 पर विदेशी धरती पर शतक लगाना अपने आप में खास उपलब्धि है। पिछले 30 साल में देवदत्त से पहले भारत के लिये यह कमाल सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसे दिग्गज कर चुके थे। अब इस खास क्लब में देवदत्त पडीक्कल का नाम भी चमकने लगा है। देवदत्त की पारी की खूबसूरती सिर्फ उनके शतक में नहीं थी। उन्होंने पहली पारी में केएल राहुल के साथ तीसरे विकेट के लिए 150 रन की शानदार साझेदारी की और भारतीय पारी को मजबूत आधार दिया। नंबर-3 पर बाएं हाथ से शतक लगाने के मामले में देवदत्त ने सलीम दुरानी, बापू नाडकर्णी, अजीत वाडेकर, एकनाथ सोलकर और सुरिंदर अमरनाथ जैसे बल्लेबाजों की बराबरी कर ली है। हालांकि इस मामले में सबसे आगे विनोद कांबली हैं, जिन्होंने भारत के लिए नंबर-3 पर बायें हाथ के बल्लेबाज के रूप में चार शतक लगाये हैं। सौरव गांगुली के नाम तीन शतक हैं। देवदत्त पडीक्कल ने अपने टेस्ट करियर का पहला सैकड़ा ऐसे दिन लगाया, जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था। क्रिकेट की किताब में उनका यह दिन अब हमेशा के लिये यादगार हो गया।















