Garhwa(Nityanand Dubey) : गर्मी की मद्धम पड़ती आंच के बीच गढ़वा के टाउन हॉल में उम्मीदों का सूरज चमका। सजे मंच पर बेटियों के सपनों की झलक थी, तो दर्शक दीर्घा में माताओं की आंखों में गर्व के चमकते सितारे। मंच से आवाज़ आई, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भविष्य की वो इबारत है, जो हर बेटी के हाथों से लिखी जानी है। यह कहना है गढ़वा के DC शेखर जमुआर का। DC ने कहा “अब वक्त आ गया है कि यह नारा सिर्फ दीवारों पर नहीं, बल्कि हमारे दिलों में जिंदा रहे। बेटा-बेटी एक समान हैं, यह सोच अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता होनी चाहिये।” बेटियों की कामयाबी के किस्से जब सुनाये गये, पूरे हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। DSP यशोधरा ने लड़कियों को संबोधित करते हुए कहा कि “समाज की रूढ़ियों को चुनौती देने का समय आ गया है। तुम सिर्फ़ घर की जिम्मेदारी उठाने के लिये नहीं, बल्कि अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए पैदा हुई हो।” मौका था गढ़वा के निलाम्बर पीताम्बर बहुद्देशीय सांस्कृतिक भवन टाउन हॉल में आयोजित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ सम्मान समारोह का।
सपनों के रंग, हुनर की पहचान
इस खास मौके पर पेंटिंग, डांसिंग, सिंगिंग, भाषण और निबंध लेखन जैसी प्रतियोगिताओं ने समां बांध दिया। छोटी-छोटी बच्चियों की कलम से निकले शब्द मानो एक नये भविष्य का दस्तावेज़ लिख रहे थे। जब सम्मान समारोह शुरू हुआ, तो मंच पर एक के बाद एक बेटियां आईं, उनके साथ उनकी माएं— गर्व से सिर ऊंचा किये, आंखों में बरसों की मेहनत का संतोष लिये। उन्हें नमन करते हुये अधिकारी बोले, “हर बेटी एक जन्नी माता है, जो समाज को नई दिशा देने आई है।” सम्मान समारोह में यह संकल्प लिया गया कि हर बेटी पढ़ेगी, बढ़ेगी और एक नई सुबह लेकर आयेगी। क्योंकि, “जब एक बेटी पढ़ती है, तो पूरा समाज रोशन होता है।” मौके पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी प्रमेश कुशवाहा, विभिन्न प्रखंडों के CDPO, महिला पर्यवेक्षिका सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्रायें एवं उनके माता-पिता मौजूद थे।












