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हजारों साल से कहर बरपा रहा कोरोना, 25 हजार साल पहले ऐसे मचाई थी तबाही

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  • हजारों साल से इंसानों पर कहर बरपा रहा कोरोना वायरस
  • पूर्वी एशिया को 25 हजार साल पहले प्राचीन कोरोना ने किया था परेशान

TRENDING : आज सारी दुनिया कोरोना वायरस के कहर से कराह रही है। नई स्टडी से से पता चला है कि इसका खौफ नया नहीं है। यह बहुत पुराना और खौफनाक वायरस है। यह लगभग 25 हजार साल पहले से इंसानों को परेशान कर रहा है। प्राचीन कोरोना वायरस ने पूर्वी एशिया में 25 हजार साल पहले कहर बरपाया था। इस प्राचीन दानव के वंशज ने पिछले डेढ़ साल में 30 लाख लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

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वायरस के आगमन इंसान कमजोर

कोरोना वायरस ने यह बता दिया है कि इंसान कितनी भी तरक्की कर ले, वह हमेशा नए वायरसों के आगे कमजोर ही रहेगा। नए वायरस के आगे इंसान प्राचीन समय से ही उस छोर पर खड़ा रहा है, जहां से उसे बचने का कोई विकल्प नहीं मिलता।

वायरस ने याद दिलाया इंसान का स्तर

नई स्टडी को करने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के एसिसटेंट प्रोफेसर डेविड एनार्ड ने कहा कि हर समय एक ऐसा वायरस रहा है, जिसने इंसानों को उनका स्तर याद दिलाया है। उन्हें प्रो. डेविड ने बताया कि वायरस भी इंसानों की तरह पीढ़ी दर पीढ़ी अपने नए जीनोम के जरिए आगे बढ़ते रहे हैं। सिर्फ वायरस ही नहीं ये प्रक्रिया हर प्रकार के पैथोजेन (Pathogens) यानी रोगजनकों के साथ होती है। यानी हर प्रकार के रोगाणु अपनी पीढ़ियों में लगातार बदलाव करते हैं ताकि वो भी प्रकृति में सर्वाइव कर सकें।

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2504 लोगों के जीनोम की जांच

जल्द होने वाले बदलाव को म्यूटेशन और देर से होने वाले बदलाव को प्रो. डेविड एनार्ड ने बताया कि उनकी टीम ने प्राचीन कोरोना वायरस को खोजने के लिए दुनिया भर के 26 अलग-अलग इंसानी आबादी के 2504 लोगों के जीनोम की जांच की। इससे पता चला कि कोरोना वायरस जैसे पैथोजेन इंसानों के DNA में प्राकृतिक चयन करके पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते आए हैं।

भविष्य के वायरस की मिलेगी जानकारी

इस स्टडी से इस बात की जानकारी में मदद मिलेगी कि भविष्य में किस तरह के वायरस आ सकते हैं। या फिर वो किस तरह के लोगों को संक्रमित करेगा। इसे इवोल्यूशन कहते हैं। गौरतलब है कि प्रोफेसर डेविड की यह सट्डी bioRxiv पर प्रकाशित हुई है। अभी तक इसका पीयर रिव्यू नहीं हुआ है. साइंस जर्नल में इसके प्रकाशन के लिए रिव्यू किया जा रहा है।

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420 प्रोटीन के 42 कोड्स

प्रोफेसर डेविनड एनार्ड की टीम ने देखा कि कोरोना वायरस से संपर्क में आने वाले इंसान के शरीर के 420 प्रोटीन के 42 कोड्स होते हैं।ये कोड्स 25 हजार साल पहले से लेकर 5000 साल पहले तक लगातार खुद को म्यूटेट और इवॉल्व करते रहे।  यानी प्राचीन कोरोना वायरस हर सदी में इंसानों को परेशान करता रहा है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर जोएल वर्थीम ने कहा इस स्टडी से एक बात तो स्पष्ट है कि कोरोना वायरस हजारों सालों से इंसानों को प्रभावित कर रहा है।

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