Hazaribagh(Sunil Sahu) : धूप अपने ढलान पर थी, लेकिन बड़कागांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज कुछ अलग ही रौशनी में नहाया हुआ था। नई उम्मीद, नई ऊर्जा और एक नई सोच लेकर जब हजारीबाग के नव-नियुक्त सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार वहां पहुंचे, तो अस्पताल के गलियारों में मानो सन्नाटे ने भी राहत की सांस ली। यह महज़ एक निरीक्षण नहीं था यह था एक संकल्प! “रुटीन चेक अभियान” के तहत डॉ कुमार न केवल केंद्र पहुंचे, बल्कि अस्पताल की दीवारों, दवाखानों और कर्मचारियों की निगाहों तक को पढ़ लिया। वे हर कोने से रु-ब-रु हुये, कहीं दवाइयों की स्थिति जानी, तो कहीं वैक्सीन की उपलब्धता पर संतोष जताया। मगर जहां ज़रा सी भी कमी पाई, वहीं मौके पर ही प्रभारी को सधे शब्दों में निर्देश दे डाले “यह सिर्फ अस्पताल नहीं, भरोसे की जगह है। इसे ऐसा ही बनाना है।”
उन्होंने कहा कि साइन बोर्ड जैसे छोटे लेकिन जरूरी कामों में भी कोताही नहीं चलेगी। “जो चीज़ें आंखों को दिखेंगी, वहीं दिल को भरोसा देंगी,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। वहीं सभी स्वास्थ्यकर्मियों को ड्रेस कोड में रहने की हिदायत दी गई “पहचान सिर्फ चेहरों से नहीं, वर्दी से भी होती है।” इस निरीक्षण के दौरान आरसीएच ऑफिसर और क्वालिटी इन्क्वास के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। उनके कदमों से एक संदेश साफ था अब जिले में स्वास्थ्य विभाग सिर्फ काग़ज़ों पर नहीं, ज़मीन पर चलेगा।
फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम: डर नहीं, दवा ज़रूरी है
10 अगस्त से 25 अगस्त तक चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की भी विशेष जानकारी दी गई। डॉ अशोक कुमार ने अपील की “दवा से डरने की जरूरत नहीं है। ये वही दवा है, जो हमने भी ली है। अफवाहें हैं… और अफवाहें कभी इलाज नहीं होतीं। जब स्वास्थ्यकर्मी आपके दरवाज़े आएं, दवा ज़रूर खाएं वहीं, उनके सामने।”
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— KohramLive (@KohramLive) August 14, 2025














