UP : पूरे देश को झकझोर देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड को लेकर चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में आखिरकार आज शाम करीब साढ़े चार बजे अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया। अब अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी। फिलहाल सजा का फैसला सुरक्षित रखा गया है। बुधवार सुबह करीब 10 बजे से ही मेरठ कचहरी में लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी थी। मीडिया कर्मी अदालत परिसर में पहुंच चुके थे। चर्चित हत्याकांड का फैसला जानने के लिए आम लोगों की नजरें भी अदालत पर थीं। उम्मीद थी कि दोपहर करीब ढाई बजे फैसला सुनाया जा सकता है, लेकिन इंतजार बढ़ता गया। दोपहर करीब दो बजे मृतक सौरभ की मां, बड़े भाई और अन्य परिजन भी अदालत पहुंचे। शाम करीब 4.30 बजे जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की सुनवाई के दौरान सामने आये घटनाक्रम के आधार पर मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी माना। अब अगली प्रक्रिया में अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी।
जेल से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी
सुरक्षा कारणों के चलते दोनों आरोपियों को जेल से अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। जज के कोर्ट में पहुंचते ही चौधरी चरण सिंह जिला कारागार से दोनों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू हुई। जिला जज ने पहले साहिल से पूछा, “आवाज आ रही है साहिल शुक्ला?” साहिल ने हाथ उठाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके बाद मुस्कान से भी हाथ उठाने को कहा गया। फैसले के दिन को लेकर जज ने पूछा कि आज फैसले का दिन आ गया है, क्या लग रहा है? इस पर मुस्कान ने कहा, “मुझे कुछ नहीं बोलना।” जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, दोनों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिये डरे-सहमे नजर आये। दोष सिद्ध होने के बाद दोनों रोते हुये और आंसू पोंछते हुए अपनी बैरक में लौटे। जेल अधीक्षक के मुताबिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान दोनों एक साथ खड़े थे, लेकिन उन्होंने आपस में कोई बातचीत नहीं की।
24 फरवरी को लंदन से मेरठ लौटा था सौरभ
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत लंदन में नौकरी करता था। वह 24 फरवरी 2025 को अपनी बेटी के जन्मदिन के लिये मेरठ स्थित घर लौटा था। अभियोजन का आरोप था कि सौरभ के घर लौटने के बाद पत्नी मुस्कान और साहिल के बीच संबंधों में वह बाधा बन रहा था। इसी वजह से दोनों ने उसकी हत्या की साजिश रची। अभियोजन के मुताबिक, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ के खाने में नशीली दवा मिला दी गई। उसके बेसुध होकर सो जाने के बाद मुस्कान ने साहिल को घर बुलाया। अभियोजन के अनुसार, इसके बाद दोनों ने धारदार हथियारों से सौरभ पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।
शव को नीले ड्रम में सीमेंट से किया गया सील
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई। इसके लिये बड़ा नीला प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदी गई। अभियोजन के अनुसार, शव के टुकड़ों को पॉलीथीन में लपेटकर ड्रम में रखा गया और उसके बाद सीमेंट के घोल से ड्रम को सील कर दिया गया। इसी वजह से यह मामला लोगों के बीच ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ। अभियोजन के अनुसार, वारदात के बाद दोनों आरोपी शिमला-मनाली घूमने चले गये थे। पुलिस जांच में इस यात्रा को भी मामले के घटनाक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा गया। सौरभ के भाई के बयान पर 18 मार्च 2025 को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। इसके अगले दिन, यानी 19 मार्च को, पुलिस ने घर से नीले ड्रम में सीमेंट से जमा हुआ शव बरामद किया। इसके बाद पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने और संपत्ति विवाद के चलते आरोपियों को फंसाये जाने का तर्क रखा था। वहीं अभियोजन पक्ष ने पुलिस विवेचना के साथ चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों को आधार बनाया। मामले से जुड़े जांच अधिकारियों के साक्ष्य अदालत में पेश किये गये। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. दिनेश सिंह चौहान के बयान को भी अभियोजन के साक्ष्यों में शामिल किया गया। अभियोजन के अनुसार, सौरभ की मौत अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक से हुई थी। फैसले के बाद सौरभ की बुआ कुसुम ने दोनों आरोपियों के लिये फांसी की सजा की मांग की। उन्होंने घटना की भयावहता का हवाला देते हुये कड़ी से कड़ी सजा की मांग की। अब सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर हैं, जहां सजा के बिंदु पर फैसला होगा।





