Kohramlive : राजस्थान के झालावाड़ के पीपलोदी गांव की वो सुबह एक आम दिन की तरह शुरू हुई थी। मासूम चेहरे स्कूल की दहलीज पर प्रार्थना के लिए जमा हो रहे थे… लेकिन किसी को नहीं पता था कि आसमान से पहले छत गिरेगी। मनोहरथाना के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत अचानक धड़ाम से गिर पड़ी। पल भर में हंसी, शोर और मासूमियत मलबे में दब गई। 32 बच्चे कमरे में थे… और छत के साथ जैसे किस्मत भी टूट कर उन पर गिर पड़ी।
7 मासूमों की मौत, कई जख्मी
चार बच्चों की मौत मौके पर ही हो गई, दो ने अस्पताल में दम तोड़ा, और एक नन्ही जान इलाज के दौरान चल बसी।
13 साल की मीना बाई और उसका भाई कान्हा स्कूल आए थे सीखने, पर चले गए दुनिया से बहुत दूर। 25 से ज्यादा घायल बच्चे अस्पतालों में ज़िंदगी से जूझ रहे हैं, तो वहीं उनके माता-पिता अस्पताल की दीवारों से टकराकर बस रो रहे हैं जवाबों के लिए नहीं, बस अपने बच्चे की एक और सांस के लिए।
शिक्षा मंत्री ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए
मदन दिलावर ने घटनास्थल का दौरा किया, घायलों का इलाज सरकारी खर्चे पर सुनिश्चित करने की बात कही। प्रशासन, शिक्षा विभाग और जिला अधिकारी मौके पर हैं। कारण तलाशे जा रहे हैं। प्रथम दृष्ट्या जर्जर भवन और लगातार बारिश को हादसे की वजह माना जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, हर किसी ने गहरा दुख जताया। ये सिर्फ एक हादसा नहीं, शिक्षा व्यवस्था पर गिरा भरोसे का मलबा था।














